नालंदा: बिहार में सरकार और पुलिस के वरीय अधिकारी लगातार बेहतर और पीपल फ्रेंडली पुलिसिंग का दावा करते दिखते हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यही वजह है कि लोग मुश्किल वक्त में भी पुलिस के पास जाने से डरते हैं। यानि रक्षक से डरने की परंपरा अभी भी बिहार में जीवित है और इसकी एक बानगी देखने को मिली मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा में। एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जो पुलिस की वर्दी को दागदार कर रहा है वहीं बदनाम पुलिस की कहावत को भी चरितार्थ कर रहा है।
दरअसल नालंदा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें साफ दिख रहा है एक पुरुष पुलिस अधिकारी महिला का बाल पकड़ कर उसे घसीट रहा है साथ ही महिला को थप्पड़ भी मार रहा है। मौके पर महिला पुलिसकर्मी के मौजूद होने के बावजूद पुरुष पुलिस अधिकारी महिला को पकड़ कर घसीट रहा है और विरोध करने पर उसे थप्पड़ भी मार रहा है। मामला नालंदा के थरथरी थाना क्षेत्र के दिरीपुर गांव का बताया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद वरीय पुलिस अधिकारियों ने जांच के बाद कार्रवाई किये जाने का दावा किया है तो दूसरी तरफ आरोपी पुलिस अधिकारी ने आरोप को सिरे से ख़ारिज कर दिया और कहा कि अगर वह उस वक्त महिला को अलग नहीं करते तो स्थानीय लोग पुलिस पर हमला कर सकते थे और माहौल बिगड़ सकता था।
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बताया जा रहा है कि कोर्ट के आदेश पर थरथरी थानाध्यक्ष संजय कुमार एक मामले के आरोपी स्थानीय रामबचन प्रसाद के घर इश्तेहार चिपकाने गए थे। इस दौरान आरोपी घर में ही मौजूद था। आरोपी की आंगनबाड़ी कर्मी पत्नी ने कहा कि हमने पुलिस अधिकारी से रात में आने का कारण पूछा था और इसी बात पर थानाध्यक्ष ने महिला पुलिसकर्मी के मौजूद रहने के बावजूद मेरा बाल पकड़ कर खिंच लिया और विरोध करने पर थप्पड़ भी जड़ दिया। हालांकि इस दौरान पुलिस ने मामले के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वीडियो में भी साफ दिख रहा है कि अधिकारी महिला को थप्पड़ मरते हैं फिर महिला पुलिसकर्मी के बीच बचाव करने के बाद वे मौके से बाहर निकल जाते हैं।
वीडियो सामने आने के बाद अब हिलसा के डीएसपी 2 ऋषिराज ने कहा कि वीडियो उन्होंने भी देखा है और अब इसकी जांच कराई जा रही है। आरोप सही पाए जाने पर थानाध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वहीं जब इस मामले में थानाध्यक्ष संजय कुमार बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि पुलिस जब आरोपी को गिरफ्तार कर निकल रही थी तो उसकी पत्नी ने रास्ता रोक लिया था और स्थानीय लोग भी जुटने लगे थे। इस दौरान पुलिस ने बस महिला को रास्ते से हटाया था। अगर हम उन्हें नहीं हटाते तो फिर वहां लोग पुलिस पर हमला कर सकते थे। महिला का बाल पकड़ कर घसीटने और थप्पड़ मारने का आरोप निराधार है।
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नालंदा से मो महमूद आलम की रिपोर्ट