नारायणपुर से चल रहा था रहस्यमय टेलीफोन एक्सचेंज, CBI ने दर्ज की FIR
भोजपुर: नारायणपुर गांव से संचालित एक कथित अवैध और फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथ में ले ली है। इस मामले को गंभीर साइबर अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मानते हुए CBI ने औपचारिक रूप से FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
CBI के अनुसार, यह अवैध टेलीफोन एक्सचेंज अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर संचालित किया जा रहा था। इसमें VOIP (Voice Over Internet Protocol) सिस्टम के जरिए इंटरनेट कॉल को सामान्य वॉयस कॉल में बदला जाता था, ताकि कॉल की असली लोकेशन और पहचान छिपाई जा सके। जांच एजेंसी ने आशंका जताई है कि इस तरह की तकनीक का उपयोग देशभर में बड़े पैमाने पर साइबर अपराध को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।
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इस पूरे मामले का खुलासा पहले बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने किया था। EOU की जांच और रिपोर्ट के आधार पर ही बिहार सरकार ने पिछले साल जुलाई में इस केस को CBI को सौंपने की सिफारिश की थी। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद CBI ने EOU की FIR को अपने केस के रूप में पुनः दर्ज किया है। CBI ने इस मामले में भोजपुर के नारायणपुर गांव में एक्सचेंज का संचालन कर रहे मुख्य आरोपी मुकेश कुमार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के मालदा स्थित प्वाइंट ऑफ सेल ऑपरेटर रेजाउल हक और मुक्तादिर हुसैन को नामजद किया है। एजेंसी के मुताबिक, मुकेश कुमार द्वारा इस्तेमाल किए गए कुल 67 संदिग्ध सिम कार्ड बेचे गए थे।
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EOU की जांच में यह भी सामने आया था कि इस अवैध सेटअप के जरिए 20 हजार से अधिक कॉल विभिन्न नंबरों पर की गई थीं। बरामद सिम बॉक्स में उपयोग किए गए सभी सिम कार्ड पश्चिम बंगाल के मालदा में सक्रिय किए गए थे, जिनका सीधा संबंध रेजाउल हक और मुक्तादिर हुसैन से पाया गया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि VOIP सिस्टम का उपयोग विदेशों में आतंकी संगठन अपने स्लीपर सेल और राष्ट्रविरोधी तत्वों से संपर्क के लिए भी करते रहे हैं, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। CBI इस एंगल से भी मामले की गहराई से जांच कर रही है।