चीनी मिल से 1990 में किया था 997 बोरा चीनी का गबन, अब कोर्ट ने 6 अधिकारियों को सुनाई सजा...
मुजफ्फरपुर: बिहार में NDA की सरकार लगातार अपराध और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज मामलों में 6 आरोपी सरकारी कर्मियों को विशेष निगरानी कोर्ट ने सजा सुनाई है। मुजफ्फरपुर निगरानी कोर्ट के न्यायाधीश दशरथ मिश्रा ने सभी आरोपी सरकारी अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। सभी अधिकारियों को पद का दुरूपयोग के साथ ही धोखेबाजी और जालसाजी का दोष लगाते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई है।
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निगरानी की विशेष कोर्ट ने बिहार राज्य सुगर कारपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रशासन प्रमुख नन्द किशोर सिंह को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने दो वर्ष का सश्रम कारावास और दस हजार रूपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर उन्हें एक महीने का अतिरिक्त जेल होगी। इसके साथ ही बिहार राज्य सुगर कारपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक के विशेष सहायक उमेश प्रसाद सिंह को भी दो वर्ष सश्रम जेल और दस हजार रूपये का अर्थदंड लगाया गया है। इसके साथ ही तत्कालीन सुगर कोषांग लिपिक लालबाबू प्रसाद, सुशील कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन लेखा पदाधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव और तत्कालीन चीनी बिक्री प्रभारी धीरेंद्र झा को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष का सश्रम कारावास और पचीस हजार रूपये का अर्थदंड लगाया है।
बता दें कि वर्ष 1990 में लौरिया चीनी मिल से पद का दुरूपयोग कर 997 बोरा चीनी जालसाजी कर गबन करने का मामला निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने दर्ज किया था जिसके बाद छानबीन की गई। इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद अब कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
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पटना से चंदन तिवारी की रिपोर्ट