कोहली का करिश्मा जारी, संगकारा का रिकॉर्ड ध्वस्त कर इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि एक पूरे दौर की पहचान बन जाते हैं। विराट कोहली ऐसा ही एक नाम है। इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज़ बनने के साथ ही उन्होंने श्रीलंका के महान कुमार संगकारा का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यह उपलब्धि सिर्फ एक सांख्यिकीय मील का पत्थर नहीं, बल्कि उस निरंतरता, अनुशासन और मानसिक मजबूती की कहानी है, जिसने कोहली को इस मुकाम तक पहुंचाया।
कोहली का सफर प्रतिभा से शुरू होकर परिश्रम और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुका है। 93 रनों की उनकी हालिया पारी इस बात का प्रमाण है कि उम्र, आलोचना या दबाव उनके खेल की धार को कुंद नहीं कर पाए हैं। खास बात यह है कि कोहली अब व्यक्तिगत माइलस्टोन के बजाय टीम की ज़रूरतों पर ज़्यादा ध्यान देते नज़र आते हैं। लक्ष्य का पीछा करते हुए परिस्थितियों के अनुसार खेलना, जोखिम और संयम के बीच संतुलन बनाना—यही उनके परिपक्व खिलाड़ी बनने की पहचान है।

नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते हुए कोहली का बदला हुआ दृष्टिकोण भी काबिल-ए-गौर है। वह अब हालात का इंतज़ार करने के बजाय ज़रूरत पड़ने पर आक्रामक होकर विपक्ष पर दबाव बनाते हैं। उनका मानना है कि क्रिकेट में कभी भी एक गेंद मैच का रुख बदल सकती है, इसलिए आत्मविश्वास के साथ पहल करना ज़रूरी है। यह सोच आज के आधुनिक क्रिकेट की मांग को भी दर्शाती है।
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मैदान के बाहर कोहली का व्यक्तित्व उतना ही संवेदनशील दिखाई देता है। अपने अवॉर्ड्स मां को सौंप देना या किसी खिलाड़ी के आउट होने पर दर्शकों की तालियों को लेकर असहज महसूस करना—ये बातें बताती हैं कि वह केवल एक सुपरस्टार नहीं, बल्कि खेल की मर्यादाओं को समझने वाले खिलाड़ी भी हैं। शायद यही कारण है कि वह आज भी युवा खिलाड़ियों और प्रशंसकों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
कप्तान शुभमन गिल का यह कहना कि कोहली जैसा प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं, उनके प्रभाव को रेखांकित करता है। कोहली सिर्फ रन नहीं बनाते, वह टीम में विश्वास भरते हैं। दबाव की घड़ी में उनका शांत रहना और वर्तमान में जीने का संदेश हर खिलाड़ी के लिए सीख है।