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मुंबई नहीं अब बिहार बन रहा इस क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र, राजधानी पटना के साथ राजगीर, भागलपुर और मोतिहारी...

Mumbai is no longer the center of attraction in this sector

अब मुम्बई की तरह बड़ी-बड़ी फिल्म बनाने की राह पर बिहार, भोजपुरी, मगही के साथ हिंदी-अंग्रेजी फिल्मों की हो रही शूटिंग। अब फ़िल्म डायरेक्टर की पहली पसंद बना बिहार, राज्य की खूबसूरत लोकेशन पर शूट हो रही फ़िल्में 

पटना: अब वो दिन दूर नहीं जब बिहार भी मुम्बई की तरह फिल्म सिटी के नाम से पहचाना जायेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन में चल रही डबल इंजन की सरकार में प्रदेश कला व संस्कृति में अलग-अलग कीर्तिमान हासिल कर रहा है। आज बिहार अपनी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और फिल्म-फ्रेंडली माहौल के कारण देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं की पसंद बनता जा रहा है। इस बदलाव के केंद्र में है राज्य सरकार की दूरदर्शी ‘बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति, जिसने बिहार को फिल्म निर्माण के नए नक्शे पर स्थापित कर दिया है। इस नीति के लागू होने के बाद अब तक राज्य में 40 फिल्मों को शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है, जिनमें से 33 फिल्मों की शूटिंग सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। 

खास बात यह है कि ये फिल्में सिर्फ भोजपुरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी और मगही जैसी कई भाषाओं में बनाई जा रही हैं। इससे यह स्पष्ट है कि बिहार अब बहुभाषी और विविधतापूर्ण सिनेमा का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। फिल्म निर्माताओं के लिए अब मुंबई और दिल्ली ही एकमात्र विकल्प नहीं रह गए हैं। पटना, राजगीर, नालंदा, गया, भागलपुर और मोतिहारी जैसे शहर अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक खूबसूरती के कारण शूटिंग के लिए पसंद किए जा रहे हैं। राज्य में शूटिंग होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सीधा लाभ मिला है। 

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होटल, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट और अन्य सहायक सेवाओं में मांग बढ़ी है, जिससे स्थानीय व्यवसायों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इसके साथ ही फिल्म निर्माण से जुड़े तकनीकी क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। स्थानीय युवाओं को कैमरा ऑपरेशन, साउंड रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और प्रोडक्शन मैनेजमेंट जैसी विधाओं में प्रशिक्षण मिल रहा है। बिहार राज्य फिल्म विकास निगम द्वारा आयोजित वर्कशॉप, एक्सपर्ट मास्टरक्लास और स्क्रिप्ट राइटिंग सेमिनारों ने राज्य में एक मजबूत फिल्म इकोसिस्टम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

फिल्म प्रोत्साहन नीति की एक खास पहल है ‘फिल्म टूरिज्म प्रमोशन’। इसके तहत किसी फिल्म में जब किसी स्थान को दिखाया जाता है, तो वह अपने आप पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन जाता है। इसी सोच के तहत बिहार सरकार ने उन फिल्मों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया है, जिनमें राज्य के पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से दर्शाया गया हो। राजगीर, नालंदा, सोनपुर मेला और भागलपुर के घाट अब फिल्मों के साथ-साथ पर्यटकों की पसंदीदा सूची में भी शामिल हो रहे हैं। 

कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री अरूण शंकर प्रसाद ने बताया कि “बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति ने राज्य की छवि को नया आयाम दिया है। 40 फिल्मों की शूटिंग अनुमति, बहुभाषी सिनेमा, स्थानीय रोजगार और फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा देकर बिहार को उभरते फिल्म हब के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने मार्च–अप्रैल माह में मुंबई में फिल्म निर्माता–निर्देशकों के साथ बैठक आयोजित किए जाने का निर्देश दिया, जिससे बिहार फिल्म नीति से संबंधित हितधारकों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सके।

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