वोटिंग से पहले बढ़ा सस्पेंस: Tejashwi ने विधायकों को किया एकजुट, Nitish-Samrat की NDA बैठकों से गर्म सियासत
बिहार की राजनीति अक्सर चुनाव के समय नए समीकरण और नई रणनीतियों के साथ सामने आती है। इस बार भी Rajya Sabha चुनाव को लेकर सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। सत्ता पक्ष और महागठबंधन दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में पूरी ताकत लगा रहे हैं, क्योंकि पांचवीं सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और अनिश्चित माना जा रहा है। महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पटना के होटल पनाश में ठहराने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि पांचवीं सीट पर फंसे पेंच को सुलझाने और किसी भी तरह की टूट-फूट को रोकने के लिए सभी विधायकों को एक जगह रखा जा रहा है।
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नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav रात में होटल में विधायकों के साथ बैठक करेंगे और वोटिंग से जुड़ी रणनीति पर चर्चा करेंगे। राजद का आरोप है कि सत्ताधारी दल की ओर से हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिश हो सकती है, इसलिए विधायकों की निगरानी के लिए पूर्व विधायकों को भी जिम्मेदारी दी गई है। दूसरी ओर एनडीए भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मंत्री विजय चौधरी के आवास पर जेडीयू विधायकों की बैठक जारी है, जिसमें मुख्यमंत्री Nitish Kumar के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। जेडीयू की बैठक के बाद यहीं एनडीए की संयुक्त बैठक भी होगी, जिसमें चुनाव की अंतिम रणनीति तय की जाएगी। रविवार सुबह जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर भी एनडीए नेताओं की बैठक हुई। वहीं मंत्री लेसी सिंह के घर जेडीयू विधायकों की बैठक और स्टेट गेस्ट हाउस में बीजेपी की अलग बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
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जानकारी के अनुसार डिप्टी सीएम Samrat Choudhary के आवास पर सत्ता पक्ष के विधायकों को मॉक पोल की भी प्रैक्टिस कराई गई है ताकि वोटिंग प्रक्रिया में कोई गलती न हो। प्रदेश राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पांचवें उम्मीदवार को जबरन मैदान में उतारा है और धनबल व तंत्रबल के भरोसे चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। इधर महागठबंधन की एक और बैठक पूर्व मुख्यमंत्री Lalu Prasad Yadav और Rabri Devi की मौजूदगी में होने की संभावना है। इसमें राजद, कांग्रेस, आईपीपी और वाम दलों के विधायक शामिल होंगे। गौरतलब है कि 16 मार्च को होने वाली वोटिंग से पहले दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को साधने में जुटे हैं। करीब 12 साल बाद बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की नौबत आई है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।