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दरभंगा की अंतिम महारानी हुई पंचतत्व में विलीन, अंतिम संस्कार से पहले आपस में ही उलझ गए परिजन फिर...

The last Maharani of Darbhanga has been cremated.

दरभंगा: दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी एवं अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का अंतिम संस्कार राज परिसर स्थित श्यामा माई मंदिर परिसर में किया गया। महारानी का अंतिम संस्कार महाराज कामेश्वर सिंह की समाधि के समीप किया गया। उन्हें पौत्र रत्नेश्वर सिंह ने मुखाग्नि दी जबकि युवराज कपिलेश्वर सिंह बिहार से बाहर होने की वजह से अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके।

महारानी कामसुंदरी देवी का निधन 96 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के कारण हो गया। उनके निधन की खबर से मिथिला समेत बिहार में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग कल्याणी निवास पहुंचे। सोमवार को महारानी की निधन की सूचना मिलने के बाद बिहार सरकार में मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल, मदन सहनी, जिलाधिकारी कौशल कुमार समेत अन्य कई लोग भी पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मंत्री दिलीप जायसवाल ने उनके निधन को मिथिला ही नहीं बल्कि बिहार के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

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अंतिम संस्कार से पहले हंगामा

महारानी कामसुंदरी देवी के अंतिम संस्कार से पहले कल्याणी निवास परिसर में शव को कब्जे में लेने को लेकर दो रिश्तेदार आपस में ही उलझ गए और मामला हाथापाई तक जा पहुंचा। इस दौरान पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया और फिर उनका अंतिम संस्कार किया जा सका। लोगों ने बताया कि दोनों पक्ष महारानी के मायके से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट के प्रबंधक उदयनाथ झा और महारानी के अन्य परिजन के के बीच विवाद शुरू हो गया और पुलिस की मौजूदगी में मारपीट हुई। हालांकि घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग किया और कल्याणी परिसर में पुलिस बल की तैनाती की गई है।

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