वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग हुआ स्थापित, CM-Deputy CM रहे उपस्थित
पूर्वी चंपारण: संस्कृति और श्रद्धा की धरती बिहार के पूर्वी चंपारण में शनिवार को विश्व के सबसे बड़े मंदिर में विश्व का सबसे ऊँचा शिवलिंग स्थापित किया गया। निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व का सबसे ऊँचे शिवलिंग के स्थापना के लिए भव्य तैयारी की गई थी जिसमें यजमान के रूप में समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी और उनके पति सायन कुणाल रहे जबकि इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा समेत अन्य कई दिग्गज हस्तियाँ भी उपस्थित रही। इस दौरान महावीर मंदिर, अयोध्या राम मंदिर, वाराणसी के कशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात, हरिद्वार समेत अन्य जगहों से आये पंडितों ने पूरे विधि विधान से पूजा करवाई।
कंबोडिया से फूल 8 जगहों से मंगाया गंगा जल
विराट रामायण मंदिर में शिवलिंग स्थापना के लिए कंबोडिया और कोलकाता से फूल मंगाए जबकि शिवलिंग की स्थापना के लिए भोपाल और राजस्थान से करें मंगाए गए। शिवलिंग की स्थापना के लिए फूल सहित भांग, धतूरा और बेलपत्र से 18 फीट का माला तैयार किया गया। इसके साथ ही शिवलिंग की स्थापना के लिए कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, गंगा सागर, सोनपुर और रामेश्वरम से गंगा जल मंगाया गया है जबकि सिंधु, नर्मदा, नारायणी, कावेरी, गंडक नदी का भी जल मंगाया गया था।
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आज ही हुई थी शिवलिंग की उत्पत्ति
शनिवार को माघ कृष्ण चतुर्दशी की तिथि है और माना जाता है कि इसी दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और भगवान शिव की लिंग के रूप में पूजा हुई थी। इस दिन का महत्व शिवरात्रि के समान माना जाता है इसलिए आज के दिन ही सहस्त्रलिंगी विशाल शिवलिंग की स्थापना की गई। विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग तमिलनाडू के महाबलीपुरम में तैयार किया गया था। करीब 33 फीट उंचा, 33 फीट लंबा और 210 मीट्रिक टन वजनी इस शिवलिंग के निर्माण में करीब 3 करोड़ रूपये खर्च किये गये हैं। शिवलिंग ग्रेनाइट के एक पत्थर को तराश कर बनाया गया है जिसमें भारत का शिल्प कला प्रदर्शित किया गया है।
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आचार्य किशोर कुणाल का है ड्रीम प्रोजेक्ट
बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य और महावीर मंदिर स्थान न्यास समिति के सचिव सायन कुणाल ने बताया कि उनके पिता आचार्य किशोर कुणाल ने इस मंदिर के निर्माण की नींव रखी थी। उनके पिता का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसे वह विश्व का सबसे बड़ा मंदिर के रूप में देखना चाहते थे। यह मंदिर निर्माण के बाद विश्व का सबसे बड़ा मंदिर होगा जिसे रामायण पर आधारित बनाया जा रहा है इसलिए इस मंदिर का नाम भी विराट रामायण मंदिर रखा गया है। इस मंदिर में भगवान राम और भगवान शिव का अद्भुत संगम होगा। पूर्वी चंपारण के चकिया में स्थित इस मंदिर का निर्माण अगले 6 वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। सायन कुणाल ने बताया कि मंदिर का ससमय निर्माण पूर्ण करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।
वैश्विक धार्मिक पर्यटन के रूप में उभरेगा
माना जा रहा है कि यह मंदिर भारत में एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में उभरेगा और यहां देश विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने आयेंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को नई पहचान मिलेगी. पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन सहयोग करें तो यह जगह बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
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