darsh news

बिहार की फल और सब्जियां पहुंच रही विदेशों तक, कृषि निर्यात को नई रफ्तार दे रहा ई-रेडिएशन सेंटर

bihar ke fasal utpad ab vidsho me

बिहार से कृषि निर्यात को नई रफ्तार दे रहा ई-रेडिएशन सेंटर। बिहटा में ई-रेडिएशन सेंटर से अब सालभर सुरक्षित रहेंगे कृषि उत्पाद

पटना: बिहार कृषि उत्पादक राज्य होने के कारण इसकी अर्थव्यवस्था कृषि औऱ कृषि से बने उत्पादों पर निर्भर रहती है। यही कारण है कि राज्य सरकार कृषि और कृषि से जुड़े उद्योगों पर लगातार विकासात्मक कार्य कर रही है। और उसी का परिणाम है कि राज्य से कृषि उत्पादों के निर्यात में अब तक सबसे बड़ी बाधा माने जाने वाले बैक्टीरिया, फंगस और कीटों की समस्या लगभग खत्म हो गई है। पटना के बिहटा इंडस्ट्रियल एरिया में स्थापित अत्याधुनिक ई-रेडिएशन सेंटर ने राज्य के कृषि निर्यात को नई दिशा दे दी है। पांच एकड़ भूमि में स्थापित यह सेंटर पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा और बिहार का पहला ई-रेडिएशन सेंटर है, जहां पैक हाउस से लेकर कोल्ड स्टोरेज तक की व्यवस्था की गई है। बैक्टेरिया और फंगस से मुक्त करने के बाद कृषि उत्पादों को यहां तीन से छह महीने तक संरक्षित किया जा सकेगा।

इस सेंटर में गामा किरणों की नियंत्रित तकनीक के जरिए कृषि उत्पादों को बैक्टीरिया और फंगस से मुक्त किया जाता है, जिसके बाद इन्हें तीन से छह महीने तक सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जा सकता है। कुछ उत्पादों की शेल्फ लाइफ तो एक साल तक बढ़ाई जा रही है। सेंटर के संचालक सह Jitban Supply Chain Pvt Ltd के Founder Director के विकास कुमार के अनुसार, “इस साल बिहार से कैमिकल फ्री आम, मखाना, लीची, आलू समेत कई कृषि उत्पादों का निर्यात किया जाएगा। ई-रेडिएशन तकनीक से उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहती है और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं। आगे बताते हैं कि बिहार से अब दूधिया मालदह से लेकर हाजीपुर का केला खाड़ी देशों, जापान, नेपाल समेत अनेक देशों में निर्यात किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें     -        NEET छात्रा की मौत मामले में SIT तेजी से कर रही है जांच, पहुंची शंभू गर्ल्स हॉस्टल...

अब सालभर सुरक्षित रहेगा मखाना

मखाना, जो मिथिलांचल क्षेत्र की पहचान है, लंबे समय से भंडारण और निर्यात में कीट लगने की समस्या से जूझ रहा था। फूड टेक्नोलॉजी डिवीजन, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के सहयोग से मखाना के दीर्घकालीन भंडारण और समुद्री कंटेनर निर्यात के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) विकसित की गई है। इसके तहत अब मखाना का निर्यात सीधे बिहार से समुद्री कंटेनर के जरिए किया जा सकेगा। विकास कुमार बताते हैं कि पिछले दो महीनों में करीब 60 टन मखाना को संरक्षित कर उसकी लाइफ एक साल तक बढ़ाई गई, जबकि पहले यह केवल तीन-चार महीने ही सुरक्षित रह पाता था। चार महीने बाद कीड़े लगने से विदेशों में मखाना रिजेक्ट हो जाता था, जिससे हर साल 20 से 30 प्रतिशत तक नुकसान होता था। नई तकनीक से यह नुकसान लगभग समाप्त हो गया है।

क्या है ई-रेडिएशन सेंटर

ई-रेडिएशन सेंटर में कृषि उत्पादों, मसालों, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को विकिरण तकनीक से प्रोसेस किया जाता है। इसमें गामा किरणों या इलेक्ट्रॉन बीम का नियंत्रित उपयोग होता है, जो खाद्य पदार्थों में मौजूद बैक्टीरिया, कीड़े और फफूंद को नष्ट कर देता है। इस प्रक्रिया से न तो खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता प्रभावित होती है और न ही कोई हानिकारक अवशेष बचता है। इसके साथ ही यहां कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक पैकेजिंग सुविधाएं भी मौजूद हैं, जिससे उत्पाद सीधे निर्यात के लिए तैयार हो जाते हैं।

यह भी पढ़ें     -        जश्न के बीच BJP कार्यालय में हंगामा शुरू, एक तरफ नेता कर रहे थे ख़ुशी का इजहार तो दूसरी तरफ...

निर्यात और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा

रेडिएशन प्रोसेस को सतत और हरित तकनीक माना जाता है, जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बढ़ावा देती है। निविदा प्रक्रिया के तहत जिटबन सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड को सात वर्षों के लिए इस सेंटर का संचालन और प्रबंधन सौंपा गया है। वर्तमान में जिटबन केला, आम, लीची, मखाना, मशरूम, इमली, मसाले और आलू सहित कई कृषि उत्पादों के लिए संपूर्ण निर्यात समाधान उपलब्ध करा रहा है। भविष्य में उत्पाद पोर्टफोलियो को और विस्तार देने की भी योजना है।

रोजगार एवं किसानों के बेहतर भविष्य की शुरुआत 

विकास बताते हैं कि इस उद्योग से अभी लगभग 80 लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें नीतीश सरकार के महिला सशक्तिकरण के विजन को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं की संख्या को 50 प्रतिशत रखने का प्रयास किया गया है। मूल रुप से बिहार के रहने वाले विकास बताते हैं कि कोरोना से पहले वे मर्चेन्ट नेवी में कार्यरत थे, लेकिन कोरोना के बाद वे फिर बिहार आ गए और फिर यहीं उन्हें इस रेडिएशन सेंटर खोले जाने का विचार आया। बिहार सरकार की उद्योग के प्रति सकारात्मक सोच को देखकर इन्होनें इस व्यवसाय को शुरु किया, जिसमें शुरुआत में जीविका ने बहुत मदद की। आज विकास एवं उनके व्यवसाय की सफलता से अन्य युवा उद्मी भी प्रभावित हो रहे हैं।  

बिचौलियों की भूमिका खत्म 

जहां बिहार से कृषि निर्यात अभी शुरुआती अवस्था में है, वहीं ई-रेडिएशन सेंटर जैसी सुविधाओं की उपलब्धता से निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। इससे न केवल किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा, बल्कि बिहार की पहचान भी अब गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित कृषि निर्यात राज्य के रूप में स्थापित होने लगी है। साथ ही कृषि उत्पादों के क्रय-विक्रय में बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाने से किसानों को पूरा लाभ मिलने लगा है।

यह भी पढ़ें     -        बिहार राज्य की काराओं में बंदियों द्वारा निर्मित उत्पाद अब खादी मॉल एवं बिहार संग्रहालय में उपलब्ध


Scan and join

darsh news whats app qr