शराबबंदी के मामले पर कांग्रेस के नेता अजीत शर्मा के द्वारा यह कहने कि शराबबंदी को चालू कर दिया जाए और दुगुने दाम पर बेचा जाए 


इस पर दिलीप जायसवाल ने  कहा कि जब तक शराब इस बिहार में चल रहा था जो समाज के हालात थे जिस तरह से विशेष करके महिलाओं पर उत्पीड़न होता था 


शराब पीकर लोग जिस तरह से अपराध की घटना करते थे अब उसमे कमी आयी है।

 

अभी के शराब बंदी से अपराध हिंसा और विशेष करके जो महिलाओं का शोषण उत्पीड़न होता था इसमें बहुत कमी आई है 


आप अगर उस दिन के रिकॉर्ड को देखिए जब शराब यहां पर खुलेआम बिकता था और उस समय के रिकॉर्ड को देखिए तो गाड़ी का एक्सीडेंट सबसे ज्यादा होता था 


अपराध अधिक होते थे अब ये कम हो गया है साल मे एक दो घटना होती है।


लेकिन क्या हम समाज के संस्कारों को बिगाड़ कर कमाई की बात हो सकते हैं क्या हम आने वाले भविष्य के बच्चों के जनरेशन को जिंदगी को बर्बाद कर दे 


जो भी शराब खोलने की बात करते है उन लोगों को नैतिक पतन हो गया है 


कितना आराम से बोल देते हैं कि शराब से कमाई कर हम जो बिहार का विकास करेंगे 


कभी यह नहीं बोलते हैं कि बिहार के माहौल को ठीक करके हम यहां उद्योग लाकर बिहार का विकास करेंगे 


बिहार के अंदर पर्यटन स्थल है उसको डेवलप कर विकास कर बिहार का विकास करेंगे 


सरकार कर रही है लेकिन इन सब बातों की चर्चा नहीं हो रही है हमारे अंदर जितने अच्छाई है उसको अगर विकसित करें तो बिहार बहुत आगे बढ़ेगा और बढ़ रहा है 


लेकिन यह बार-बार बोलने की शराब खोल करके मैं बता देता हूं कि जो जो नेता यह बोल रहे हैं जनता समझ रही है जो नेता बोल रहा है शराबबंदी को खुलवा देंगे उनका शराब माफियाओं के साथ प्रभाव में है 


और इस बात की जांच होनी चाहिए कि जो नेता बोल रहा है कि शराब बंदी खुलवा देंगे शराब माफिया से उनका क्या रिश्ता है उसकी जांच होनी चाहिए



सरकार से अनुरोध करेंगे उसकी जांच करा जाए 


शराब से मौत हुई है इस पर दिलीप जायसवाल ने कहा कि जब शराब चल रही थी उसे समय से कितनी मौतें हुई थी प्रेस और मीडिया को यह देखना चाहिए 


10 गुना कमी हुआ इस तरह लेकिन आज कोई जब पकड़े जाते हैं तो पता चलता है कि सभी लोग उन्हीं लोगों से संबंध है 


मैं तो कहता हूं कि इसकी जांच होनी चाहिए आखिर इसके पीछे कौन लोग है  


शराब माफियाओ का कहीं ना कहीं मनोबल बढ़ाने का काम कर रहे है ये लोग।