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गंडक नदी पर खतरे की दस्तक! डुमरिया सेतु कहीं हादसे का न्योता तो नहीं?

Danger knocks on the Gandak River

गोपालगंज और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाले गंडक नदी पर स्थित डुमरिया पुल की हालत अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। हाल ही में पुल की संरचना में बड़ी तकनीकी खराबी सामने आई है, जिससे इसके स्प्रिंग सिस्टम के फेल होने की पुष्टि हुई है। यह वही सिस्टम है जो वाहनों के गुजरने के दौरान पुल को नियंत्रित कंपन और संतुलन प्रदान करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्प्रिंग फेल होने से पुल पर चल रहे हर वाहन के साथ जोखिम बढ़ रहा है। पुल की अधिकतम भार वहन क्षमता 110 टन निर्धारित है, लेकिन 5 जनवरी को लगभग 210 टन वजनी ओवरलोडेड मालवाहक को इस पुल से गुजारा गया। इसी अत्यधिक दबाव के कारण पुल की स्प्रिंग टूट गई, जिससे इसकी मजबूती और आयु दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तलब की है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि पुराने पुल पर भार कम करने के लिए समानांतर नए सेतु का निर्माण कार्य तेज किया जाए। बताया जाता है कि ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के तहत एनएच-27 पर गंडक नदी पर एक नए पुल का निर्माण वर्ष 2008 में लगभग 88 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ था। लेकिन वर्ष 2011 में निर्माणाधीन पुल का एक पाया धंस जाने के बाद निर्माण एजेंसी काम छोड़कर चली गई और परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर अधूरी रह गई।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह पुल किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही मरम्मत और नए पुल के निर्माण को लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। फिलहाल डुमरिया पुल की बिगड़ती हालत ने हजारों यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।


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