उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने चेतावनी दी, हड़तालियों की रिपोर्ट मांगी गई – गैरहाजिर अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी
बिहार में प्रशासनिक सुचारु संचालन को लेकर हाल ही में स्थिति गंभीर बनी हुई है। राजस्व विभाग के अधिकारियों की हड़ताल ने राज्य के अंचल कार्यालयों में कामकाज प्रभावित किया है, जिससे जनता को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंचलाधिकारी और अन्य राजस्व अधिकारी लगातार हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल नौ मार्च से चल रही है और अब तीसरे दिन भी अधिकांश अंचल कार्यालयों में कामकाज ठप है। इस वजह से जमीन से जुड़े कार्यों के साथ ही प्रमाणपत्र जारी करने में भी परेशानी हो रही है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलों से हड़ताल में शामिल और कार्यरत पदाधिकारियों की रिपोर्ट मांगी है। भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय, भू-अर्जन निदेशालय और चकबंदी निदेशालय के निदेशकों के माध्यम से प्रमंडलीय आयुक्त और समाहर्ताओं को पत्र भेजकर यह जानकारी मंगाई गई है। रिपोर्ट के आधार पर विभाग हड़तालियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है और अंचल कार्यालयों के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक कदम उठा सकता है।
पदाधिकारियों के त्यागपत्र स्वीकार किए गए
हाल ही में बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पांच अधिकारियों के त्यागपत्र स्वीकार कर लिए हैं। इनमें वैशाली जिले के गोरौल अंचल के अंशु कुमार, रोहतास जिले के बिक्रमगंज के राजन कुमार, सारण जिले के परसा की शिवांगी पांडेय, रोहतास जिले के राजपुर की अंकिता वर्मा और हाजीपुर के स्मृति कुमारी शामिल हैं। इनके त्यागपत्र संबंधित तारीख से प्रभावी माने गए हैं।
सिन्हा ने हड़ताल पर गए अधिकारियों को चेतावनी दी है कि जो कर्मचारी काम पर नहीं लौटेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और विभाग में नई बहाली की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मार्च का महीना हड़ताल का नहीं, बल्कि काम करने का है। राजस्व विभाग की इस स्थिति से स्पष्ट होता है कि सरकार अधिकारियों की उपस्थिति और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के लिए अब सख्त कदम उठाने जा रही है।