राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश एक बार फिर संसद के उच्च सदन में लौट आए हैं। इस बार उनकी वापसी चुनाव के जरिए नहीं, बल्कि राष्ट्रपति द्वारा मनोनयन के माध्यम से हुई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अधिसूचना जारी कर उन्हें राज्यसभा का सदस्य नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उस सीट के खाली होने के बाद की गई है, जो एक मनोनीत सदस्य के रिटायरमेंट के कारण रिक्त हो गई थी।
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दिलचस्प बात यह है कि इस बार हरिवंश को जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया था। ऐसे में यह माना जा रहा था कि उनका संसदीय कार्यकाल अब समाप्त हो गया है। लेकिन राष्ट्रपति के मनोनयन ने उनकी राजनीतिक पारी को नया मोड़ दे दिया है। हरिवंश को लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता रहा है। हालांकि हाल के दिनों में दोनों के रिश्तों में पहले जैसी सक्रियता नहीं दिखी, जिसके चलते जेडीयू से उन्हें दोबारा मौका नहीं मिलने की चर्चा थी। इसके बावजूद उनकी संसदीय अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए उन्हें फिर से सदन में लाया गया है।
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उनके पिछले कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सदन में उनकी कार्यशैली की सराहना की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि हरिवंश ने राज्यसभा का संचालन बेहद संतुलित और प्रभावी ढंग से किया और अपने अनुभव से सदन को समृद्ध किया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह मनोनयन केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि आगे भी सक्रिय भूमिका निभाने का संकेत है।