पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, इस फैसले के बावजूद वह फिलहाल मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे। दरअसल, नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे, जिसके बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी थी। इसी क्रम में उन्होंने MLC पद से इस्तीफा दे दिया।
नीतीश कुमार के इस कदम के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “बीजेपी का ‘ऑपरेशन फिनिश नीतीश’ सफल हो गया है” और आरोप लगाया कि दबाव में आकर यह इस्तीफा लिया गया। रोहिणी ने यह भी कहा कि “कुर्सी से चिपके रहने की राजनीति का यही अंजाम होता है।”
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वहीं, जदयू नेताओं ने इस इस्तीफे को पूरी तरह सामान्य और प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। जदयू एमएलसी संजय गांधी ने कहा कि यह कोई भावुक क्षण नहीं था, बल्कि मुख्यमंत्री ने पूरी सहजता के साथ नियमों का पालन किया। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार हमेशा संवैधानिक मर्यादाओं को प्राथमिकता देते हैं। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भी पुष्टि की कि मुख्यमंत्री का इस्तीफा प्राप्त हो चुका है और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि सीट को जल्द ही रिक्त घोषित किया जाएगा।
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इस बीच, राज्य सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह इस्तीफा अनिवार्य था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में बिहार की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, या फिर यह केवल संवैधानिक प्रक्रिया तक ही सीमित रहेगा।