वेतन अधिक तो लेते हैं लेकिन नहीं देते हैं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मांझी ने बिहार के शिक्षक समेत ब्राह्मणवाद को लेकर कहा...
पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी अक्सर अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहते हैं। एक बार फिर उन्होंने ब्राह्मणवाद और शिक्षकों को लेकर बड़ा बयान दिया है। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से बड़ी अपील भी की और कहा कि आप अपने काम को लेकर किसी तरह की लापरवाही न करें बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को दें ताकि बच्चे शिक्षित हो सकें। इस दौरान उन्होंने बिहार सरकार से शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए निगरानी और सुधारात्मक कदमों को मजबूत किये जाने की भी मांग की।
शनिवार को गया जी में एक निजी विद्यालय के उद्घाटन समारोह में पहुंचे केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में काफी सुधार की आवश्यकता है। सरकार शिक्षकों को अच्छा वेतन तो देती है लेकिन कई स्थानों पर शिक्षा की गुणवत्ता अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। सरकारी शिक्षक अगर अधिक जिम्मेवारी और समर्पण के साथ बच्चों को पढाएं ताकि सरकारी विद्यालय भी निजी विद्यालयों की तरह बेहतर परिणाम दे सकें।
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केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि निजी विद्यालयों में अपेक्षाकृत सरकारी स्कूल के शिक्षकों से कम वेतन मिलती है लेकिन ये लोग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में सफल होते हैं। ऐसे में सरकार विद्यालयों के शिक्षकों को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। मांझी ने कहा कि अगर शिक्षक पूरी निष्ठां से पढ़ाएंगे तो समाज उन्हें सम्मान देगा और उनका मान बढ़ेगा। कुछ विद्यालयों में अनुशासन की समस्या देखने को मिलती है, जहां शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुँचते या निर्धारित समय से पहले चले जाते हैं।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार सरकार से अपील की कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और अह्दिक प्रभावी बनाने के लिए सुधारात्मक क़दमों को मजबूत किया जाये। सरकार शिक्षा पर भारी खर्च तो कर रही है लेकिन उसका सकारात्मक परिणाम नहीं दिखाई दे रहा है। यदि शिक्षक, समाज और सरकार मिल कर काम करें तो बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है। इस दौरान उन्होंने ब्राह्मणवाद को लेकर एक सवाल के जवाब में कहा कि ब्राह्मण कोई जातिगत पहचान नहीं बल्कि ज्ञान और कर्म से जुडी अवधारणा है। उनके अनुसार सनातन परंपरा में व्यक्ति की पहचान उसके कर्म से होती है न कि जन्म से।
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गया जी से मनीष कुमार की रिपोर्ट