चुनाव के दो महीने डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस, बिहार के शीर्ष नेतृत्व की करेगी छुट्टी, कन्हैया-पप्पू...
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्षी महागठबंधन के सभी घटक दलों की करारी हार हुई। विधानसभा चुनाव में एक तरफ राजद महज 25 सीटों पर सिमट गई तो दूसरी तरफ 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी कांग्रेस मात्र 6 सीटों पर ही रह गई। चुनाव परिणाम आने और बिहार में नई सरकार के गठन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी कि कांग्रेस के सभी 6 विधायक NDA में शामिल होने वाले हैं। पार्टी की टूट की खबर के बाद कांग्रेस आलाकमान ने डैमेज कंट्रोल को लेकर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी।
बीते दिनों कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बिहार के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया और उनकी परेशानी पूछी। इसके साथ ही कांग्रेस आलाकमान ने सभी विधायकों को पार्टी में हर संभव सुविधाएं देने का भिया आश्वासन दिया। अब खबर आ रही है कि अपने विधायकों को टूटने से बचाने के लिए बिहार में हार का ठीकरा अब प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी के सर फूटने वाला है और नेतृत्व प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक कई लोगों की छुट्टी करने जा रही है।
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अल्लावारू-राजेश राम की होगी छुट्टी
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सभी नाराज विधायकों ने पार्टी आलाकमान के साथ बैठक में प्रदेश नेतृत्व के संबंध में कई शिकायतें की जिसमें नेतृत्वकर्ता और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय का अभाव, मूल सामाजिक समीकरण से भटकना और राजद के साथ गठबंधन से पार्टी को नुकसान की बात सामने आई। अब इस फीडबैक के आधार पर पार्टी नेतृत्व एक्शन मोड में नजर आ रही है और माना जा रहा है कि राहुल गांधी के खास करीबी कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावारू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की छुट्टी की जा सकती है। बता दें कि दोनों ही नेताओं को प्रदेश की जिम्मेवारी करीब एक वर्ष पूर्व ही दी गई थी और माना जा रहा था कि इनके नेतृत्व में बिहार चुनाव में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी।
पुराने समीकरण पर लौटेगी पार्टी
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस अब एक बार फिर से अपने पुराने समीकरण पर काम करेगी। इसके तहत पार्टी अब सिर्फ मुस्लिम और EBC -OBC वोट के साथ ही सवर्ण वोट पर को भी साधेगी और साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी। पार्टी अब पुराने समीकरण भूमिहार, ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी। माना जा रहा है कि पार्टी एक बार फिर प्रदेश नेतृत्व का जिम्मा किसी सवर्ण नेता को सौंपेगी साथ ही सदन का जिम्मा किसी मुस्लिम नेता के हाथ। हालांकि इस बीच कुछ नेताओं ने मुस्लिम नेता के हाथ में प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपे जाने की भी मांग की है।
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कन्हैया को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधायकों ने पूर्णिया के विधायक पप्पू यादव से भी नाराजगी जाहिर की है जिसके बाद अब माना जा रहा है कि पार्टी पप्पू यादव से भी दुरी बना सकती है। वहीं युवा स्टार चेहरा कन्हैया कुमार को बिहार में बड़ी जिम्मेवारी दी जा सकती है। बता दें कि लोकसभा चुनाव में पार्टी से बगावत के बाद पप्पू यादव अलग थलग पड़ गए थे लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों में शिरकत करने की मंजूरी दे दी गई और वे कई बार राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मंच पर भी दिखे थे। कांग्रेस के नेताओं का एक गुट पप्पू यादव की अधिक सक्रियता भी हार का कारण बता रहे हैं।
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