CBI जांच का भी SIT जैसा ही होगा हश्र, NEET छात्रा के परिजनों ने कहा 'हमें सरकार पर नहीं है भरोसा'
पटना: राजधानी पटना में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत का मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने CBI से करवाने की मांग की है। CBI जांच की मांग के बावजूद परिजन खुश नहीं हैं और उन्होंने सरकार और पुलिस पर मामले की लीपापोती का गंभीर आरोप लगाया। परिजनों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमें इस बात का पहले से अंदाजा था कि लीपापोती की जाएगी और पुलिस सरकार के दवाब में इस तरह का काम कर रही है। हमने कभी CBI जांच की मांग ही नहीं की फिर सरकार क्यों करवाना चाहती है। इस मामले में जिस तरह से पुलिस और SIT ने लीपापोती की उसी तरह से अब CBI भी करेगी।
हम नहीं चाहते CBI जांच
मीडिया से बात करते हुए छात्रा के परिजनों ने कहा कि हमने कभी CBI जांच की मांग की ही नहीं फिर सरकार ने इस मामले को क्यों ट्रांसफर किया। घटना के 15 से 20 दिन हो गए और इतने दिनों में पुलिस ने बस इस मामले की लीपापोती और साक्ष्य मिटाने का काम किया है। इस मामले में सरकार और पुलिस चाहती ही नहीं है कि मामला साफ हो क्योंकि सरकार खुद ही किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में है। परिजनों ने कहा कि इस मामले में हॉस्टल, हॉस्पिटल और प्रशासन की मिलीभगत शुरू से ही है। हमें अब सरकार से न्याय की उम्मीद नहीं है। हमने कभी CBI जांच की मांग नहीं की, हमारी मांग है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश के नेतृत्व में न्यायिक जांच की जाये।
DGP ने दी धमकी
परिजनों ने कहा कि कल जब हम डीजीपी से मुलाकात करने गए थे उस वक्त उन्होंने भी हमें यही कहा कि आपकी बेटी ने आत्महत्या की है। हमलोगों पर ही उन्होंने तरह तरह के आरोप लगाये। बिहार पुलिस सरकार के दबाव में काम कर रही है। इस मामले में गृह मंत्री भी पुलिस पर दबाव बना रहे हैं। मुलाकात के दौरान डीजीपी ने हमें कई तरह से धमकाया और कहा कि इस मामले को हम CBI के पास फॉरवर्ड कर दे रहे हैं फिर दो वर्षों तक आप लोग दौड़ते रहिये और तब बताइयेगा कि क्या न्याय मिली। बिहार पुलिस ने सरे साक्ष्यों को मिटा दिया है और अब CBI को केस दे रही है। ऐसे में अब CBI भी वही करेगी जो SIT ने किया। परिजनों ने कहा कि हमें पहले CBI पर भरोसा था लेकिन अब डीजीपी उसका भी उपयोग हमें डराने धमकाने के लिए कर रहे हैं।
न्यायिक जांच करवाए सरकार
परिजनों ने कहा कि अब हमारी एक ही मांग है कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के नेतृत्व में जांच की जाये और जिन साक्ष्यों को मिटाया गया है उसे भी देखा जाये। परिजनों ने कहा कि अब हमें न तो सरकार पर भरोसा है, न पुलिस पर और न ही CBI पर। मेरी विनती है कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस मामले का संज्ञान लें और न्यायिक जांच करवाएं। परिजनों ने हॉस्टल संचालक पर सीधा सीधा आरोप लगाया और कहा कि पहले वे लोग मान नहीं रहे थे कि गलत हुआ है और जब पोस्टमार्टम और FSL की रिपोर्ट आई तो डीजीपी कह रहे हैं कि ये सारे रिपोर्ट गलत हैं, हम प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल का रिपोर्ट मानेंगे।
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