राबड़ी आवास पर सियासी संग्राम! आदेश के बाद भी क्यों नहीं खाली होगा बंगला?
पटना की सियासत में एक बार फिर सरकारी आवास को लेकर हलचल तेज है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नाम नया आवास अलॉट होने के बावजूद 10 सर्कुलर रोड खाली नहीं होने की वजह अब सामने आ रही है। यह मामला सिर्फ एक बंगले का नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन और राजनीतिक दबावों से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, राबड़ी देवी से आवास खाली कराने का फैसला भाजपा के एक बड़े नेता के दबाव में आगे बढ़ा। नई सरकार बनने के बाद इस आदेश को तेजी से लागू कराने की कोशिश हुई। भवन निर्माण विभाग, जो जदयू कोटे के मंत्री विजय चौधरी के पास है, उसी के जरिए प्रक्रिया शुरू की गई। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी एक अफसर से इस काम को आगे बढ़ाने को कहा गया।
हालांकि यहां एक अहम मोड़ आया। राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित नया बंगला अलॉट कर दिया गया, लेकिन न तो 10 सर्कुलर रोड खाली करने का नोटिस जारी हुआ और न ही उस बंगले को किसी अन्य मंत्री को दिया गया। मामला तब सुर्खियों में आया, जब मीडिया में खबरें चलीं। इसके बाद नीतीश कुमार सक्रिय हुए और पूरे प्रकरण की जानकारी ली। चर्चा है कि उन्होंने हस्तक्षेप करते हुए इस फैसले को फिलहाल रोक दिया और संबंधित भाजपा नेता को दूसरे विभागों में दखल न देने की सख्त हिदायत दी।
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अब बात नए आवास की। 39 हार्डिंग रोड बंगले की मरम्मत लगभग पूरी हो चुकी है। रंग-रोगन, बिजली, प्लंबिंग और गार्डन की साफ-सफाई का काम निपटाया जा चुका है। यह बंगला मंत्रियों को मिलने वाले बड़े आवासों में दूसरे नंबर पर आता है। दो मंजिला इस घर में छह बड़े कमरे, स्टाफ और सुरक्षा के लिए अलग क्वार्टर, बड़ा गार्डन और आधुनिक सुविधाओं वाला ऑफिस मौजूद है।
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लेकिन दिक्कत यही है। राबड़ी देवी अगर पूरे परिवार—लालू प्रसाद यादव, बेटे-बेटियां और नाती-पोते—के साथ रहना चाहें, तो यह आवास छोटा पड़ सकता है। यही वजह मानी जा रही है कि 10 सर्कुलर रोड, जो बीते दो दशकों से राजद की राजनीति का केंद्र रहा है, उसे छोड़ने की जल्दी नहीं दिख रही। कुल मिलाकर, मामला अभी ठंडे बस्ते में है और साफ संकेत हैं कि सिर्फ आदेश निकलना ही आखिरी फैसला नहीं होता, सियासत में हर कदम कई संतुलनों के बाद ही उठता है।