पटना की सड़कों पर सवर्णों का UGC नियम विरोध मार्च - काला कानून वापस लो
पटना: पटना की सड़कों पर आज सवर्ण छात्रों और सामाजिक संगठनों ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में प्रदर्शन किया। सवर्ण समाज का कहना है कि ये नियम उनकी जातिगत पहचान और अधिकारों के खिलाफ हैं और इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। सवर्ण संगठनों का सबसे बड़ा ऐतराज भेदभाव की परिभाषा और शिकायत प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि नए नियमों में दुर्भावनापूर्ण शिकायतों को रोकने का कोई ठोस प्रावधान नहीं है, जिससे छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है। इसके अलावा, जनरल कैटेगरी के छात्रों के प्रतिनिधित्व के बिना बनाई गई समितियां एकतरफा निर्णय ले सकती हैं।
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ड्राफ्ट नियमों में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के लिए जुर्माना या सस्पेंशन का प्रावधान था, लेकिन अंतिम नियमों से इसे हटा दिया गया। इस बदलाव से सवर्ण छात्रों और शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। इस कानून के विरोध में प्रमुख सवर्ण संगठन सामने आए हैं। राजस्थान के ब्राह्मण संगठन, कायस्थ महासभा, वैश्य संगठन और करणी सेना ने मिलकर “सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)” बनाई है। वहीं, उत्तर प्रदेश के विश्व हिंदू संगठन ने इस कानून को हिंदू समाज को बांटने की साजिश करार दिया है।
संगठनों का आरोप है कि बीजेपी के सामान्य कैटेगरी के नेता इस कानून को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। उनका मानना है कि सामाजिक न्याय और समानता की आड़ में सवर्ण छात्रों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सवर्ण संगठनों ने सरकार से इस नियम की पुनर्समीक्षा और शिकायत प्रक्रिया में सुधार की मांग की है। आने वाले दिनों में इस विरोध प्रदर्शन को और बड़े रूप में आयोजित करने की चेतावनी भी दी गई है।