बजट सत्र के अंतिम दिन हंगामेदार रहा सदन की कार्यवाही, शराबबंदी और इलेक्टोरल बांड को लेकर...
पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आखिरी दिन काफी हंगामेदार रहा। सत्र के अंतिम दिन पक्ष विपक्ष के बीच जम कर आरोप प्रत्यारोप और तीखी नोंक झोंक हुई। इस दौरान शराबबंदी और इलेक्टोरल बांड को लेकर जम कर हंगामा हुआ। इस दौरान राजद MLC और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह तथा JDU MLC नीरज कुमार आमने सामने आये और एक दूसरे पर जम कर आरोप प्रत्यारोप किया। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही हुई।
बजट सत्र के आखिरी दिन विधान परिषद में तारांकित प्रश्नकाल के दौरान जेलों में क्षमता से अधिक कैदी के रखे जाने पर चर्चा हो रही थी इसी दौरान JDU MLC नीरज कुमार ने लालू परिवार पर हमला करना शुरू जिसके बाद सुनील सिंह के साथ जम कर कहा सुनी हुई। इस दौरान RJD MLC सुनील सिंह JDU पर किंग महेंद्र से वर्षों तक हर महीने 99 लाख रूपये लिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी फंड में लगभग 146 करोड़ रूपये जमा किये गए और यह सारा डाटा उपलब्ध है। उन्होंने एक कंपनी ए टू बीएस इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र करते हुए कहा कि जिसकी पूंजी मात्र एक करोड़ रूपये है और सालाना टर्नओवर 27 करोड़ रूपये है उसने कथित तौर पर 24 करोड़ रूपये का चंदा दिया है।
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RJD MLC सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि 2020-22 के बीच जदयू के पास 93 करोड़ रूपये थे जिसमें से 39 करोड़ रूपये केवल दो स्रोतों से आये थे। साथ ही एक फार्मास्यूटिकल कंपनी से 27 करोड़ रूपये चंदा भी लिए जाने का उन्होंने आरोप लगाया। सुनील सिंह कहा कि जो लोग समाजवादी छवि का दावा करते हैं, वही भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे हुए हैं और बिहार की जनता को गुमराह कर रहे हैं। RJD MLC के आरोपों पर JDU MLC नीरज कुमार भड़क गए और फिर दोनों के बीच जम कर बहसबाजी हुई।
JDU MLC नीरज कुमार ने कहा कि 2005 से सत्ता में रहने के दौरान जदयू को 2019 से 2022 के दौरान इलेक्टोरल बांड के जरिये 23 करोड़ रूपये मिले जबकि राजद को मात्र 17 महीनो में 85 करोड़ रूपये का चुनावी चंदा मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बिहार में शराबबंदी लागू है तो राजद ने शराब कंपनियों से चंदा क्यों लिए। इसके साथ उन्होंने IFDA इंडस्ट्रीज लिमिटेड नामक कंपनी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिसकी पूंजी लगभग ११३ करोड़ 87 लाख रूपये है उसने 35 करोड़ रूपये का चुनावी चंदा दे दिया। नीरज कुमार ने कहा कि इलेक्टोरल बांड लेना अपराध नहीं था लेकिन शराबबंदी के बावजूद शराब कंपनियों से चंदा लेना नैतिक सवाल खड़े करता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि जो लोग शराब की बोतल लाने की बात कह रहे थे, वे एक्साइज एक्ट की धारा 30 के तहत कार्रवाई से डर गए।
बता दें कि बिहार में शराबबंदी को लेकर भी बजट सत्र में खूब हंगामा हुआ और पक्ष विपक्ष दोनों तरफ से इस कानून की समीक्षा की मांग उठी। बजट सत्र के अंतिम दिन भी इस मामले को लेकर जम कर हंगामा हुआ और पक्ष विपक्ष ने एक दूसरे पर आरोप भी लगाये। एक तरफ राजद सरकार पर भ्रष्टाचार और चंदा वसूली का आरोप लगाया तो दूसरी तरफ जदयू ने राजद पर शराब कंपनियों से मिले चुनावी चंदे लेने का आरोप लगाते हुए हिसाब की मांग कर दी।
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