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RJD में नया युग: तेजस्वी को मिली कमान, सम्राट चौधरी का समर्थन, वहीँ रोहिणी - तेजप्रताप हुए नाखुश

samrat chaudhary wishes tejasvi yadav

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के चुनावी नतीजों और पार्टी की नई रणनीति के बीच तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की खबर ने सियासत में हलचल पैदा कर दी है। पार्टी के इस फैसले पर लोगों और नेताओं की प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली हैं। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने फेसबुक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी की ताजपोशी पर तंज कसा। उन्होंने लिखा कि यह “सियासत के शिखर पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप” है और कुछ लोगों को “गिरोह-ए-घुसपैठ” का समर्थन करने वाला बताया।



वहीं, लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी बहन का समर्थन करते हुए कहा कि रोहिणी ने जो कहा वह सही है और इसमें गलत कुछ नहीं है। इस राजनीतिक विवाद के बीच विपक्ष के नेता और बिहार के डिप्टी सीएम *सम्राट चौधरी* ने तेजस्वी को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर बधाई दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “श्री तेजस्वी यादव जी को राष्ट्रीय जनता दल का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई।”

पार्टी के अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। तेजस्वी यादन के नजदीकी माने जाने वाले संजय यादव ने कहा कि अब “तेजस्वी युग” आने वाला है, उनको बधाई भी दी है, विशेष बात यह है कि तेजस्वी के अपने ही भाई-बहन इस फैसले पर आलोचनात्मक हैं, जबकि उनके राजनीतिक विरोधी नेता बधाई दे रहे हैं। 


तेजस्वी यादव को RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का निर्णय पार्टी के लिए नई दिशा और चुनौती दोनों लेकर आया है। एक तरफ़ यह कदम पार्टी की युवा पीढ़ी को सशक्त बनाने और अगले चुनावी रणनीति को मज़बूत करने की कोशिश है। वहीं, तेजस्वी के अपने ही परिवार के सदस्य—जैसे बहन रोहिणी आचार्य और भाई तेज प्रताप यादव—की आलोचनात्मक टिप्पणियाँ यह दर्शाती हैं कि पार्टी के भीतर विचारों और समझ के स्तर में मतभेद मौजूद हैं। यह विरोध केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं, बल्कि RJD की राजनीति में पुराने और नए धारणाओं के बीच टकराव का प्रतीक है। इसके बावजूद, विपक्षी नेताओं द्वारा तेजस्वी को दी गई बधाई यह संकेत देती है कि उनका नेतृत्व अब सिर्फ़ परिवार या पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार के राजनीतिक परिदृश्य पर असर डाल सकता है। परिवार और पार्टी दोनों के भीतर संतुलन बनाए रखना तेजस्वी के सामने बड़ी चुनौती होगी। अगर उन्होंने इस संतुलन को कायम किया, तो यह नया युग—“तेजस्वी युग”—RJD और बिहार की राजनीति दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।


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