रोहतास: श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण सह युवा, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री संजय सिंह टाइगर की अध्यक्षता में सोमवार को सासाराम परिसदन में संबंधित विभागों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागीय कार्यों की प्रगति, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा श्रमिकों के कल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। 

बैठक में श्रम संसाधन मंत्री द्वारा खाड़ी देशों में फंसे मजदूरों की स्थिति पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया तथा उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने हेतु अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, खाड़ी क्षेत्र में उत्पन्न युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण देश में उत्पन्न घरेलू गैस संकट के बीच विभिन्न राज्यों से वापस लौट रहे श्रमिकों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि लौट रहे श्रमिकों को सरकार की ओर से हर संभव विभागीय सहायता सुनिश्चित की जाए।

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श्रम संसाधन मंत्री ने विभाग द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी लेते हुए उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने तथा विशेष पहल के माध्यम से जरूरतमंद श्रमिकों तक सहायता पहुंचाने पर बल दिया। युवाओं के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को कौशल विकास एवं रोजगार से जोड़ने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं का कौशल आज राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश को गौरवान्वित कर रहा है। सरकार बाजार की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर युवाओं को दक्ष बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें तथा वे अन्य युवाओं को भी रोजगार से जोड़ने में सक्षम बनें।

बैठक में श्रमिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया जाए। कार्यों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विलंब को गंभीरता से लेने की बात भी दोहराई गई। साथ ही, श्रमिकों से संबंधित शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु प्रभावी तंत्र विकसित करने तथा योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने विभागों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित कार्यों को पूर्ण करें तथा नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा सुनिश्चित करें।

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