बजट में घोषणा के साथ ही जहाज रिपेयरिंग केंद्र की टेंडर प्रक्रिया शुरू, वाटर मेट्रो को लेकर भी...
पटना: परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि कोच्चि वाटर मेट्रो की तर्ज पर पटना में 1200 करोड़ रुपए की लागत से वाटर मेट्रो संचालन के लिए डीपीआर राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक्स सर्विस) की ओर से तैयार किया जा रहा है। इसमें जेटी निर्माण, टर्मिनल का विकास और जहाजों की खरीद शामिल है। टेंडर प्रक्रिया खत्म होने के बाद पटना और आसपास के घाटों से रेगुलर फेरी सेवा के लिए 22 हाइब्रिड जहाज लाने का प्रस्ताव है, जो महज 1 मीटर गहराई वाले पानी में भी चल सकता है। इनके संचालन से यात्रियों को सस्ती परिवहन सुविधा मिलेगी।
फिलहाल एक इलेक्ट्रिक हाइब्रिड वाटर मेट्रो का ट्रायल चल रहा है, एक और वाटर मेट्रो जल्द पटना आएंगी। इन दो मेट्रो का परिचालन कंगन घाट, गायघाट, गांधी घाट, दीघा घाट, फरक्का महतो घाट, नारियल घाट, पानापुर, कोंहरा घाट, कलि घाट(सोनपुर) और छेछर घाटों के बीच होगा। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) को मजबूत करेगा और पटना वासियों को सस्ती और वैकल्पिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
जहाज मरम्मती केंद्र के लिए टेंडर
पटना में जहाज रिपेयरिंग सेंटर (शिप रिपेयर फैसिलिटी) निर्माण के लिए इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) ने टेंडर प्रक्रिया तेज कर दी है। परिवहन मंत्री ने केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह बिहार में जलमार्ग के अपार संभावनाओं को साकार करने वाली दूरदर्शी पहल है। उन्होंने बताया कि पटना में जहाज मरम्मत केंद्र की अनुमानित लागत लगभग 243.20 करोड़ रुपये है। आईडब्ल्यूएआई की ओर से जारी टेंडर के तहत टेक्निकल बिड 10 फरवरी को खोली जाएगी। निर्माण कार्य शुरू होने के 24 महीनों के अंदर इसे पूरा करने का लक्ष्य है। किसी भी आने वाली अड़चनों को प्राथमिकता से दूर करते हुए काम किया जाएगा, ताकि जल्द से जल्द लोगों को गंगा जलमार्ग से बेहतर आवागमन, व्यापार और पर्यटन की सुविधा मिल सके।
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उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर कोलकाता में केवल जहाज मरम्मत की सुविधा है। ऐसे में सभी जहाजों को मरम्मत के लिए कोलकाता भेजना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों की भारी बर्बादी होती है। पटना में गंगा नदी के दक्षिणी तट पर लगभग 20 हजार वर्ग मीटर जमीन बिहार सरकार की ओर से दी जा चुकी है। यहां मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और भारी उपकरणों की रिपेयरिंग की सुविधा होगी।
केंद्र में होंगी ये सुविधाएं
- पोत संचालन और उत्थापन अवसंरचना: स्लिपवे संरचना (ढलानदार कंक्रीट प्लेटफॉर्म), साइड स्लिपवे (छोटे जहाजों के लिए), कंक्रीट प्लेटफॉर्म, जहाज लिफ्ट और स्थानांतरण प्रणाली, 800 टन क्षमता वाला मरीन बोट होइस्ट, हाइड्रोलिक ट्रेलर।
- मरम्मत कक्ष: प्राथमिक मरम्मत कक्ष, छोटे पोत कक्ष, अतिरिक्त राफ्ट फाउंडेशन स्लैब।
- उपयोगिता और परिचालन सुविधाएं: विद्युत सबस्टेशन, गैन्ट्री क्रेन, जिब क्रेन, मोबाइल क्रेन, डॉकसाइड क्रेन, जल आपूर्ति-निकासी प्रणाली (ओवरहेड टैंक, पाइपलाइन, इत्यादि)।
आईवी एक्ट 2021 के तहत जाहज की जांच अनिवार्य
हर जहाज को अंतर्देशीय पोत अधिनियम 2021 के तहत पंजीकरण और वार्षिक सर्वेक्षण (बीमा, यात्रियों के लिए सुरक्षा उपकरण, जहाज चलाने वाले चालक दल के वैध योग्यता प्रमाण प्रमाण पत्र की जांच) के साथ हर 4 साल में ड्राईडॉक में जांच अनिवार्य है। ड्राई डॉक में पानी निकालकर जहाज के जलमग्न हिस्से (प्रोपेलर, रडार, संरचना) की जांच, जंग रोकथाम और ईंधन दक्षता सुनिश्चित की जाती है। पटना में यह सुविधा मिलने से कोलकाता जाने की जरूरत नहीं होगी। गौरतलब है कि विजन 2047 के तहत देशभर में यात्रियों के जलमार्ग उपयोग को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना है।
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