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किताबें पढ़ने के लिए थीं या ढोने के लिए? बाढ़ के सरकारी स्कूल से सामने आई चौंकाने वाली तस्वीरें

Shocking pictures emerge from government school in Barh

बाढ़ अनुमंडल से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले नाबालिग छात्रों से पढ़ाई के समय भारी-भरकम पुस्तकों का बोझ ढुलवाने का आरोप लगा है। यह घटना एकडंगा पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय मसत्थू से जुड़ी बताई जा रही है, जहां कक्षा पाँचवीं से सातवीं तक के छात्रों को माथे पर किताबों के बंडल उठाकर लगभग 200 मीटर तक ले जाते देखा गया।

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सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा निःशुल्क वितरित की जाने वाली पाठ्यपुस्तकें बाढ़ प्रखंड के संकुल कार्यालय से दो ई-रिक्शा के जरिए विद्यालय तक भेजी गई थीं। आरोप है कि ई-रिक्शा चालक ने किताबों को सीधे विद्यालय परिसर के भीतर ले जाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने बच्चों को ही यह काम सौंप दिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ने लगा। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छोटे-छोटे बच्चे भारी बोझ उठाकर सड़क पार करते हुए विद्यालय की ओर बढ़ रहे हैं। कुछ बच्चों ने बताया कि उन्हें शिक्षकों के कहने पर यह काम करना पड़ा। उनका कहना है कि वे उसी विद्यालय में पढ़ते हैं और पढ़ाई के समय ही उनसे किताब ढोने को कहा गया।

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बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी मिलने पर विद्यालय के प्रभारी शिक्षक मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। वहीं, यह भी आरोप है कि भुगतान को लेकर ई-रिक्शा चालक और विद्यालय प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। इस पूरे मामले पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि बच्चों से पुस्तक ढुलवाना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और विद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि बच्चों का काम पढ़ाई करना है, न कि मजदूरी। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और जिम्मेदारों पर सख्त कदम उठाए जाएं।


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