बिहार में अब नदियां भी बन रहीं हाईवे, खाद्य सामग्री से लेकर निर्माण सामग्री तक का हो रहा परिवहन...
राष्ट्रीय जलमार्ग के रास्ते आ रही खाद्य से लेकर निर्माण सामग्री, सुगम व किफायती परिवहन का बना विकल्प। बिहार में 7 राष्ट्रीय जलमार्गों पर जेटी-टर्मिनलों का जाल बिछेगा: परिवहन मंत्री
पटना: राज्य में अंतर्देशीय जल परिवहन को विस्तार देते हुए गंगा के बाद अब सभी घोषित छह राष्ट्रीय जलमार्गों को विकसित किया जाएगा। इसके लिए परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के निदेशक को विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया है। जिसके बाद इन नदियों पर जेटी, टर्मिनल, नेविगेशन सुविधाएं और अन्य आधारभूत ढांचे विकसित किए जाएंगे। परिवहन मंत्री ने गुरुवार को पटना में जल परिवहन अवसंरचना की प्रगति समीक्षा बैठक की।
बैठक में राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन, अंआईडब्ल्यूएआई के निदेशक, राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौवहन संस्थान (निनि) के परियोजना निदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि अन्य नदियों के घाटों को भी धार्मिक और व्यावसायिक महत्व के हिसाब से विकसित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से निर्माण प्रस्ताव प्राप्त मांगा गया है।
7 घोषित राष्ट्रीय जलमार्ग
बिहार में गंगा सहित कुल सात राष्ट्रीय जलमार्ग (एनडब्ल्यू) घोषित हैं। इनमें एनडब्ल्यू-1 (गंगा), एनडब्ल्यू-37 (गंडक), एनडब्ल्यू-58 (कोसी), एनडब्ल्यू-40 (घाघरा), एनडब्ल्यू-54 (कर्मनाशा), एनडब्ल्यू-81 (पुनपुन) और एनडब्ल्यू-94 (सोन) शामिल हैं। इनकी कुल लंबाई 1,187 किलोमीटर है।
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एनओसी ना मिलने पर जताई नाराजगी
परिवहन मंत्री ने कहा कि 17 स्थानों पर नए सामुदायिक जेटी का निर्माण हो रहा है। वर्तमान में 21 जेटी मौजूद हैं, जिन्हें जल्द ही राजस्व विभाग से हस्तांतरित कर लिया जाएगा। मंत्री ने नए जेटी निर्माण में जिलों से लंबित अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) ना मिलने पर नाराजगी जताई और संबंधित जिलाधिकारियों से बातकर अविलंब एनओसी जारी करने कहा ताकि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके। ये नए जेटी नदी आधारित यातायात, स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आवागमन को और सुगम बनाएंगे।
इन जगहों पर हो रहा जेटी निर्माण
सिमरिया घाट, अयोध्या घाट, चित्रोर घाट, एनआईटी घाट, कोनहारा घाट, हरिहरनाथ मंदिर (सोनपुर), कहलगांव, खवासपुर, कंगन, पत्थर घाट, ग्यासपुर पीपापुल, चाकोसन पीपापुल और अन्य शामिल हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में मुख्यत जेटी हाई-डेंसिटी पॉलीइथिलीन (एचडीपीई) और स्टील से बनाए जाते हैं, जिनकी लागत लगभग 1.5 करोड़ रुपये होती है।
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खाद्य सामग्री से लेकर निर्माण सामग्रियों की ढुलाई
परिवहन मंत्री ने कहा कि जल परिवहन अब कागजी योजना से हकीकत बन चुका है। गंगा के माध्यम से कार्गो ढुलाई तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 9.83 लाख टन से अधिक माल की ढुलाई हुई थी, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 12.22 लाख टन से ज्यादा सामान पहुंचाया जा चुका है। इनमें खाद्य तेल, सीमेंट, बलुआ पत्थर, उर्वरक, कोयला, चावल, पशु आहार जैसे सामान शामिल हैं। इनके अलावा क्रूज शिप से पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है।
पिछले वर्षों के आंकड़े:
- 2022-23: 5.84 लाख टन माल + 145 पैसेंजर
- 2023-24: 2.82 लाख टन माल + 148 पैसेंजर
- 2024-25: 2.24 लाख टन माल + 340+ पर्यटक (21 क्रूज शिप)
- 2025-26 (अब तक): 12.22 लाख टन माल + 200+ पैसेंजर

जलमार्ग पर्यावरण-अनुकूल और किफायती विकल्प: मंत्री
परिवहन मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि गंगा बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच मजबूत व्यापारिक कड़ी है, जो बक्सर से हल्दिया तक बहती है और 12 जिलों को जोड़ती है। जलमार्ग से निर्माण सामग्री की ढुलाई सबसे सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल है। सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, निर्माण सामग्री को निकटम व सबसे सस्ते परिवहन माध्यम से मंगवाना चाहिए। वर्तमान में इसके लिए मुख्य रूप से रोड और रेल मार्ग का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि इन दोनों की तुलना में जलमार्ग सबसे किफायती है।
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मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्रति टन-किमी के हिसाब से जलमार्ग में मात्र 15 ग्राम होता है, जबकि रेल में 28 ग्राम और सड़क में 64 ग्राम। एक लीटर ईंधन से जलमार्ग पर 105 टन माल ढोया जा सकता है, रेल से 85 टन और सड़क से सिर्फ 24 टन है। वहीं, एक एचपी ऊर्जा (सिलेंडर) से जलमार्ग पर 4 हजार किग्रा तक लोड ले जाया जा सकता है, जबकि सड़क पर 150 किग्रा और रेल पर 500 किग्रा ही संभव है। लागत की बात करें तो नदी मार्ग से औसत 1.3 रुपये प्रति टन-किमी है, जबकि रेल से 2.41 रुपये और सड़क मार्ग से 3.62 रुपये सामान ढुलाई में खर्च होते है।
तुलनात्मक आंकड़े:
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (प्रति टन-किमी): जलमार्ग-15 ग्राम, रेल- 28 ग्राम, सड़क- 64 ग्राम
- एक लीटर ईंधन से माल ढुलाई: जलमार्ग- 105 टन, रेल- 85 टन, सड़क- 24 टन
- लागत (प्रति टन-किमी): जलमार्ग- 1.3 रुपये, रेल- 2.41 रुपये, सड़क- 3.62 रुपये
ऑनशोर सुविधाओं का होगा निर्माण: मंत्री
मंत्री ने बताया कि पटना के गायघाट पर हाई-लो लेवल जेटी, गोदाम और अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं। सोनपुर के कालुघाट पर मल्टीमॉडल टर्मिनल तैयार है, जहां दो मालवाहक जहाज एक साथ खड़े हो सकते हैं और जल-रेल-सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध है। वर्तमान में सात व्यावसायिक घाटों बक्सर, कच्ची दरगाह/दीघा, राघोपुर दियारा, बाढ़, अगुआनी, सुल्तानगंज, कहलगांव, बटेश्वर नाथ पर ऑनशोर सुविधाओं का भी निर्माण जारी है। अन्य घाटों को चिन्हित कर इनका निर्माण किया जाएगा।
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