पटना: आगामी अप्रैल को देश के कई राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन सीटों में से पांच सीट बिहार की भी है जिसमें अब तक 3 NDA की सीटें हैं जबकि दो महागठबंधन की। बिहार में मौजूदा राजनीतिक समीकरण के हिसाब से चार सीटों पर NDA की जीत तय है जबकि पांचवीं सीट पर NDA और महागठबंधन दोनों ही तरफ से जोड़ तोड़ की राजनीति जारी है। बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए मतदान के अंतिम दिन 6 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है।
चार पर NDA की जीत पक्की
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव के लिए गुरुवार को 6 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है जिसमें चार पर NDA की जीत तय है। इन चार राज्यसभा सीटों में से दो सीट जदयू की और दो सीट भाजपा की तय मानी जा रही है जबकि पांचवीं सीट पर उपेंद्र कुशवाहा को मेहनत करना पड़ेगा। इस एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए उपेंद्र कुशवाहा को क्रॉस वोटिंग के जरिये तीन वोटों की जरूरत है जबकि छठे उम्मीदवार को 6 वोटों की।
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कौन हैं छठे उम्मीदवार?
राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 6 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है। इन उम्मीदवारों में तीन उम्मीदवार NDA के घटक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं जबकि एक उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर हैं और दूसरे उम्मीदवार भाजपा के शिवेश कुमार हैं। शिवेश कुमार 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर सासाराम से चुनाव भी लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। NDA के पांच उम्मीदवारों में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और भाजपा के शिवेश कुमार हैं। वहीं छठे उम्मीदवार राजद के अमरेंद्रधारी सिंह ने नामांकन दाखिल किया है। उनके नामांकन के दौरान बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे।
जीत का समीकरण
बिहार की राज्यसभा की पांच सीटों में हरेक सीट पर जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। इसके हिसाब से NDA की चार सीटों पर जीत तय है जबकि पांचवीं सीट के लिए तीन सीटों की कमी हो रही है। वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन के पास मात्र 35 विधायकों का समर्थन है और उन्हें 6 अन्य विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। हालांकि महागठबंधन के नेता दावा कर रहे हैं कि ओवैसी की पार्टी के 5 विधायक और बसपा के एक विधायक महागठबंधन उम्मीदवार को अपना समर्थन देंगे। अगर महागठबंधन का यह दावा सच साबित होता है तो फिर एक सीट पर महागठबंधन का कब्ज़ा हो जायेगा। वहीं अगर भाजपा क्रॉस वोटिंग के जरिये तीन विपक्षी विधायकों का समर्थन जुटाने में सफल हो जाती है तो फिर सभी पांच सीटों पर NDA का कब्ज़ा हो जायेगा।
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