पटना: बिहार की सरकार लगातार उद्योग धंधे और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य की सरकार अब आईटी हब बंगलौर, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों को टक्कर देने की योजना पर काम कर रही है। सरकार वर्ष 2024 में आईटी नीति लेकर आई जिसके तहत बिहार में आईटी हब बनाने की तैयारी की जा रही है।
एक जानकारी के अनुसार राज्य में आईटी नीति लागू होने के बाद अब तक 22 कंपनियों ने 827 करोड़ रूपये से अधिक निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन प्रस्तावों पर बिहार में काम भी काफी तेजी से हो रहा है। नयी आईटी पॉलिसी आने के बाद बिहार को डाटा केंद्र और डिजिटल बिहार जैसी सुविधाओं के साथ सरकार कनेक्टिविटी, डाटा सुरक्षा और इ-गवर्नेंस समाधान में सुधार कर रही है। इन कदमों से बिहार में रोजगार और तकनीक की सुविधाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही लैपटॉप, कंप्यूटर, ड्रोन और सोलर पैनल की मैन्युफैक्चरिंग की 7 कंपनियां भी बहुत जल्द काम शुरू कर देंगी।
बता दें कि बिहार अब देश के अन्य विकसित राज्यों की तरह तेजी से आईटी हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।इसके तहत देश की कई बड़ी कंपनियों ने बिहार में निवेश करने में अपनी दिलचस्पी दिखाई है। बिहार में इन कंपनियों के आ जाने के बाद दिल्ली, मुंबई, बंगलौर और हैदराबाद जैसे शहरों की श्रेणी में बिहार आ जायेगा और इसकी पहचान देश के साथ ही विदेशों में भी बनेगी। इसे लेकर विभाग एक आईटी पोर्टल विकसित करेगा जिसके माध्यम से देश और विदेशों के आईटी क्षेत्र में काम करने वाले बिहारी युवाओं से राय लेगा और उन्हें बिहार में आमंत्रित भी करेगा।
बिहार को आईटी हब बनाने की दिशा में सूचना प्रोवैधिकी विभाग के अधिकारी दूसरे राज्यों में जा कर आईटी पॉलिसी का प्रचार कर लोगों को बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित भी कर रहे हैं। विभाग की तरफ से मुंबई और बेंगलुरु में सबसे अधिक आईटी कंपनी तक बिहार आईटी पॉलिसी के संबंध में जानकारी दी गयी है। बिहार में आईटी कंपनियों को अनुदानित दर पर भूमि उपलब्ध कराई जा रही है।
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