Patna :- नहाए खाए के साथ चार दिवसीय चैती छठ कि आज से शुरुआत हो गई, शुक्रवार 4 अप्रैल को इस त्यौहार का समापन होगा.
बताते चलें कि कार्तिक माह के साथ-साथ चैत माह में भी छठ त्यौहार की परंपरा है. हालांकि कार्तिक माह की अपेक्षा चैत्र माह में काफी कम संख्या में श्रद्धालु इस त्यौहार को मानते हैं, इसके बावजूद इस त्यौहार को मानने वाले श्रद्धालुओं के उत्साह में कमी नहीं रहती है, मगध के इलाके में चैती छठ विशेष रुप से मनाया जाता है.कई जगह पर जिला प्रशासन द्वारा घाटों का निर्माण कराया जाता है.
सूर्य देव और षष्ठी माता को समर्पित चार दिवसीय पर्व है. इस पर्व की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है। इस दिन व्रती गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान कर खुद को शुद्ध करते हैं। इसके बाद व्रती कद्दू-भात का सेवन करते हैं,जिसे पूरी पवित्रता और सात्विकता से तैयार किया जाता है। यह दिन व्रत की तैयारी का होता है, और इसी दिन से चार दिनों का अनुष्ठान प्रारंभ होता है।
दूसरे दिन खरना होता है.व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद प्रसाद रूप में गुड़ की खीर, रोटी, और फलों का सेवन करते हैं,और इसके बाद व्रती अगले 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं।
चैती छठ का सबसे प्रमुख दिन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होता है, जब व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। व्रती घाटों पर जाकर सूर्यास्त के समय सूप में प्रसाद के साथ सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।चौथे और अंतिम दिन व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह दिन व्रत के समापन का होता है। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती अपना उपवास तोड़ते हैं और प्रसाद का वितरण करते हैं।
छठ के प्रसाद में ठेकुआ, गन्ना , खीर, और ताजे फल होते हैं। साथ ही पूजन सामग्री में बांस का सूप, नारियल, मूली, नींबू, अदरक, और हल्दी का उपयोग होता है।