बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे छात्रों और युवाओं का आंदोलन आज और भी अधिक उग्र रूप लेता हुआ दिखा। आइसा, आरवाइए, एआइएसएफ, एसएफआई, डीवाइएफआई, एनएसयूआई और सोशल जस्टिस फार आर्मी जैसे छात्र-युवा संगठनों ने आज पटना में मुख्यमंत्री के घेराव के दौरान एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया. इस दौरान, हजारों की संख्या में छात्र-युवा अपनी मांगों के समर्थन में डाकबंगला चैराहा पहुंचे और घंटों जाम कर दिया।आंदोलन की शुरुआत कारगिल चौक से हुई।जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी आगे बढ़े, जे पी गोलंबर के पास प्रशासन ने बैरिकेड्स लगा कर प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्र-युवा पुलिस घेरे को तोड़ते हुए डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए। वहा पहुँचने के बाद, प्रदर्शनकारियों ने चौराहे को पूरी तरह से जाम कर दिया और लगभग दो घंटे तक सड़क पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया।प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट संदेश था कि वे बीपीएससी में हुई धांधली को लेकर सरकार के मुखिया से सीधे मुलाकात करना चाहते हैं. हालांकि, प्रशासन ने उनके साथ संवाद कराने से पूरी तरह से इनकार कर दिया, जिससे आंदोलन और भी उग्र हो गया।मुख्यमंत्री से मुलाकात की उनकी मांग पूरी नहीं हुई और अंततः आरवाइए के राष्ट्रीय अध्यक्ष आफताब आलम ने आंदोलन को जारी रखने की घोषणा की। उन्होंने 6 जनवरी को राज्यभर में विरोध दिवस मनाने की घोषणा की।इस आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक दलों के कई प्रमुख नेता भी शामिल हुए। भाकपा-माले, सीपीआई, सीपीएम और कांग्रेस के विधायक प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हुए और उन्होंने इस संघर्ष को लोकतंत्र और युवाओं के अधिकारों की रक्षा से जोड़ते हुए अपने समर्थन का ऐलान किया।माले विधायक दल के नेता महबूब आलम, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, अगिआंव विधायक शिवप्रकाश रंजन (जो आरवाइए के राज्य सचिव भी हैं), डुमरांव विधायक अजीत कुशवाहा, सत्यदेव राम, गोपाल रविदास, अमरजीत कुशवाहा और अन्य नेताओं ने इस आंदोलन में भाग लिया।माले नेता महबूब आलम ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार और बीपीएससी परीक्षा में हुई धांधली पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश की है।उन्होंने कहा कि यह सरकार युवा विरोधी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली है. छात्र-युवा अब इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और बिहार की जनता इस बार सत्ता से इस सरकार को उखाड़ फेंकेगी।साथ ही, सीपीआई के विधायक सूर्यकांत पासवान, कांग्रेस के विधायक दल के नेता शकील अहमद और सीपीएम के विधायक सत्येन्द्र यादव ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।प्रदर्शन में विभिन्न छात्र-युवा संगठनों के प्रमुख नेता शामिल हुए।इनमें आइसा की राज्य अध्यक्ष प्रीति कुमारी, सचिव सबीर कुमार, राज्य सह सचिव कुमार दिव्यम, नीरज यादव, आरवाइए के राज्य अध्यक्ष जितेंद्र पासवान, सह सचिव विनय कुमार, एआइएसएफ के राज्य सह सचिव सुधीर कुमार, एआइवाइएफ के राज्य सचिव रौशन कुमार, एसएफआई के राज्य अध्यक्ष कांति कुमारी, डीवाईएफआई के प्रदेश अध्यक्ष मनोज चंद्रवंशी, सोशल जस्टिस फॉर आर्मी के गौतम आनंद, आइसा के संयुक्त सचिव आशीष साह, हेमंत कुमार, मयंक यादव, दीपक यदुवंशी, अनिमेष चंदन, विकाश कुमार, शुशील कुमार था एनएसयूआई के नेतागण प्रमुख रूप से शामिल थे।छात्र-युवा संगठनों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि बीपीएससी की परीक्षा में हुई धांधली को लेकर सरकार पूरी तरह से चुप है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अब तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है और उनकी चुप्पी कई सवालों को जन्म देती है. संगठनों ने कहा कि अब न्याय की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और सरकार को इस मामले में जवाबदेही तय करनी होगी.आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनके साथ बातचीत करने के लिए तैयार नहीं होती है, तो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा।6 जनवरी को पूरे राज्य में विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें छात्र-युवा संगठनों द्वारा राज्यभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक बीपीएससी परीक्षा में हुई धांधली के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती और छात्र-युवाओं की न्याय की आवाज को स्वीकार नहीं किया जाता।छात्र-युवा संगठनों का यह आंदोलन अब केवल बीपीएससी परीक्षा की धांधली के खिलाफ ही नहीं, बल्कि राज्य की तानाशाही और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोर्चा बन गया है। इन संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी हालत में अपनी आवाज दबाने नहीं देंगे और मुख्यमंत्री से सीधे संवाद की कोशिश जारी रखेंगे।