मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिष गणना के अनुसार 14 जनवरी की रात 9 बजकर 19 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे, जिसे शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। हालांकि इस बार 14 जनवरी को षष्ट तिला एकादशी पड़ रही है। एकादशी तिथि में चावल और तिल का प्रयोग वर्जित माना गया है। जबकि मकर संक्रांति पर तिल और चावल का विशेष महत्व होता है। इसी कारण आचार्य और विद्वान जनों की राय में 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना अधिक फलदायी रहेगा।
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मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। धार्मिक रूप से इसे सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और शुभ समय का संकेत माना जाता है। लोग इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ करते हैं। तिल, गुड़, चावल और खिचड़ी का विशेष महत्व होता है।
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यह पर्व भारत के साथ-साथ नेपाल में भी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों से जाना जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में संक्रांति कहा जाता है। वहीं बिहार के कुछ इलाकों में इसे तिला संक्रांत के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान समय में मकर संक्रांति प्रायः 14 या 15 जनवरी को ही पड़ती है। वर्ष 2026 में धार्मिक दृष्टि से 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना सबसे उचित माना गया है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा, दान और पर्व मनाने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।