पटना जिले के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के अपहरण की सूचना उसके परिजनों ने पुलिस को दी थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। वरीय अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मानवीय अनुसंधान के आधार पर कार्रवाई करते हुए पीड़िता को सुरक्षित बरामद कर लिया।पीड़िता का बयान BNSS की धारा 180 और 183 के तहत दर्ज किया गया। पुलिस जांच और चिकित्सीय परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि पीड़िता का प्राथमिकी अभियुक्त के साथ प्रेम संबंध था, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई थी। इस बात की जानकारी मिलने पर आरोपी ने अपनी मां के साथ मिलकर साजिश रची और पीड़िता को एक निजी क्लिनिक में ले जाकर अवैध सर्जरी कराई।
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जांच के दौरान पता चला कि जिस संजीवनी क्लिनिक में सर्जरी की गई, वहां क्लिनिक के रजिस्टर में इस ऑपरेशन से जुड़ी कोई प्रविष्टि दर्ज नहीं थी और पुलिस को भी कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखाया गया। इसके अलावा, सर्जरी गायनेकोलॉजिस्ट की जगह एक सर्जन द्वारा कराई गई, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ऑपरेशन के दौरान पीड़िता ने एक नवजात बच्ची को जन्म दिया था। आरोप है कि आरोपी और उसकी मां बच्ची को अपने पास रखने के बजाय उसे फेंकने की योजना बना रहे थे। इसी बीच क्लिनिक के संचालक ने बच्ची को बेचने की नीयत से छिपाकर रखा और इसकी जानकारी पुलिस को नहीं दी।
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मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नवजात बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया और उसे बाल कल्याण समिति को सौंप दिया। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी, उसकी मां और संजीवनी क्लिनिक के संचालक को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। साथ ही क्लिनिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन और जिला दंडाधिकारी को पत्र भेजा गया है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता की सर्जरी करने वाले सर्जन और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।