पटना: बिहार में अपराध की बढ़ती घटनाओं को लेकर अक्सर कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन पुलिस मुख्यालय के ताजा विश्लेषण ने एक अहम सच सामने रखा है। राज्य में होने वाले ज्यादातर गंभीर अपराधों की शुरुआत किसी आपराधिक सोच से नहीं, बल्कि जमीन को लेकर चल रहे पुराने विवादों से होती है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60 प्रतिशत संगीन मामलों के पीछे भूमि विवाद मुख्य कारण हैं।
पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के अनुसार, जमीन से जुड़े मामले प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था की जिम्मेदारी होते हैं। समस्या तब खड़ी होती है जब इन विवादों का समय पर समाधान नहीं हो पाता। धीरे-धीरे आपसी तनाव बढ़ता है और मामला हिंसा, हत्या या दंगे तक पहुंच जाता है। पुलिस को तब केवल हालात संभालने की भूमिका निभानी पड़ती है।
यह भी पढ़ें: गलत दिन न मना लें मकर संक्रांति! जानिए किस दिन मनाई जाएगी
DGP ने यह भी स्वीकार किया कि पुलिस के पास जमीन विवाद सुलझाने के लिए जरूरी दस्तावेज और तकनीकी जानकारी उपलब्ध नहीं होती। खतियान, नक्शा और अद्यतन रिकॉर्ड के बिना निष्पक्ष फैसला संभव नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए अब राज्य में एक नई व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत जमीन विवादों को अब थाने या अदालत की बजाय अंचल स्तर पर सुलझाने की कोशिश होगी। हर शनिवार को अंचल कार्यालय में जनता दरबार लगाया जाएगा, जहां अंचलाधिकारी के साथ संबंधित थाना प्रभारी भी मौजूद रहेंगे। मकसद साफ है—विवाद को शुरुआती चरण में ही रोकना, ताकि वह आपराधिक घटना में न बदले।
DGP ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुलिस जमीन विवादों में सीधे दखल नहीं देगी। जब तक मामला कानून-व्यवस्था के लिए खतरा न बने, पुलिस केवल शांति बनाए रखने की भूमिका निभाएगी। पटना में हुई प्रेस वार्ता में डीजीपी ने अपराध से जुड़े वार्षिक आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि 2025 में 2024 की तुलना में संगीन अपराधों में गिरावट आई है। डकैती, हत्या, लूट, दंगा और बैंक अपराधों की घटनाएं कम हुई हैं। साथ ही बड़ी संख्या में अपराधियों की गिरफ्तारी भी की गई है।
यह भी पढ़ें: ठंड ने बढ़ाई टेंशन, बिहार में सर्दी चरम पर, 32 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
साइबर अपराध और अवैध हथियारों पर भी पुलिस की नजर सख्त हुई है। पटना में साइबर अपराध के लिए एक आधुनिक कमांड सेंटर बनाने की तैयारी है, वहीं हथियार तस्करी की सप्लाई चेन तोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि अगर जमीन विवाद समय रहते सुलझ जाएं, तो बिहार में अपराध की तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है।