पटना: लालू परिवार के लिए राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। लैंड फॉर जॉब घोटाले में आज शुक्रवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों पर आरोप तय कर दिए हैं। कुल 40 लोगों पर अब मुकदमा चलेगा, जबकि 52 आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने सबूतों को आधार मानते हुए स्वीकार किया कि लालू और उनके परिवार के खिलाफ आरोप पर्याप्त हैं। अब इन आरोपों पर मुकदमे की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें बहस के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। हालांकि लालू यादव इस निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार रखते हैं।
CBI ने क्या कहा और क्या दायर किया
CBI ने मामले की चार्जशीट में बताया कि इस घोटाले की योजना 2004 से 2009 के बीच बनाई गई थी, जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन और संपत्ति लालू परिवार के नाम कराई गई। केंद्र सरकार की जांच में सामने आया कि लालू परिवार ने बिहार में करीब 1 लाख स्क्वायर फीट जमीन महज 26 लाख रुपये में हासिल कर ली। उस समय की बाजार कीमत के अनुसार इस जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 4.39 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा, जमीन मालिकों को कई मामलों में नकद भुगतान भी किया गया।
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परिवार के सदस्यों की भूमिका
लालू यादव पर रेल मंत्री रहते हुए इस घोटाले में शामिल होने का आरोप है। उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटों तेजस्वी, तेजप्रताप के अलावा बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी आरोप हैं। बताया गया है कि नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों से जमीन ट्रांसफर कराई गई और इसे लालू परिवार को सौंपा गया।
CBI ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव ने दिल्ली में एक बंगले की खरीदी भी इसी तरह की साजिश के तहत सस्ती कीमत पर की। हृदयानंद चौधरी और अमित कात्याल जैसे अन्य लोग भी इसमें शामिल रहे। इस मामले में अदालत का यह निर्णय लालू परिवार के लिए गंभीर कानूनी चुनौती पेश करता है और आने वाले समय में इस मामले की सुनवाई और परिणाम देश की राजनीति में नया मोड़ ला सकते हैं।