बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर कदम बढ़ा रही है। 16 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य चुन लिए जाएंगे और इसके बाद दिल्ली के लिए रवाना होंगे। यह 20 साल में पहली बार होगा जब बिहार में बिना नीतीश के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आएगी। इस बदलाव के साथ ही NDA के भीतर नए चेहरे और नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि नई सरकार में मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव संभव हैं। JDU की ओर से कई करीबी नेताओं की जिम्मेदारियों में फेरबदल हो सकता है। ऐसे में कुछ पुराने मंत्री नए रुतबे के साथ बने रहेंगे, जबकि कुछ अपने पद से हट सकते हैं। इस क्रम में बिजेंद्र यादव का नाम सबसे ऊपर है। बिहार विधानसभा के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद विधायकों में से एक, बिजेंद्र यादव ने 1990 से लगातार सुपौल विधानसभा सीट पर जीत हासिल की है। वे नीतीश के बेहद करीबी और ईमानदार नेता माने जाते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने नीतीश को स्पष्ट रूप से कहा है कि जब वे राज्यसभा जाएंगे तो वे भी कैबिनेट में बने रहना नहीं चाहते। वर्तमान में बिजेंद्र यादव वित्त और ऊर्जा विभाग के साथ-साथ मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग देख रहे हैं।
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वहीं विजय चौधरी नई सरकार में मंत्री बनने के प्रबल दावेदार हैं। जदयू के ताकतवर नेताओं में शामिल, वे मुख्यमंत्री के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक हैं। डिप्टी CM की दौड़ में भी उनका नाम चर्चा में है। अशोक चौधरी और सुनील कुमार भी नीतीश के करीबी नेता हैं। अशोक चौधरी ग्रामीण कार्य मंत्री हैं और नई सरकार में उनका प्रभाव थोड़ा घट सकता है। सुनील कुमार शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन नई सरकार में उनका मंत्रालय बदल सकता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बिहार की नई सरकार में समीकरण बदलेंगे, लेकिन नीतीश के करीबी नेताओं की मौजूदगी सरकार के निर्णयों में स्थिरता और अनुभव बनाए रखेगी। इस बदलाव के साथ ही राज्य में नए नेतृत्व के साथ नई राजनीति की दिशा तय होगी।