बिहार विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम चरण में मंगलवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने दफादार और चौकीदार संघ के सदस्यों पर हुए कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का आरोप था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मियों के साथ बर्बर व्यवहार किया गया और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश हुई है।
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राष्ट्रीय जनता दल के विधायक कुमार सर्वजीत ने इस मामले को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि चौकीदारों के साथ अन्याय हुआ है और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसी दौरान विपक्षी विधायक “लाठी-गोली की सरकार नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाने लगे, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। स्थिति तब और तीखी हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सीट से खड़े हुए और विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिर है और अपना कार्यकाल पूरा करेगी। साथ ही विपक्ष की घटती संख्या का जिक्र करते हुए तंज कसा कि पहले अपनी स्थिति पर भी नजर डालनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व की सरकारों के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर नहीं थी, जबकि अब बिहार ने कई क्षेत्रों में प्रगति की है।
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राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने भी सरकार पर निशाना साधा, जिस पर मुख्यमंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा जारी रहा। कार्यवाही शुरू होने से पहले भी विपक्ष ने विधानसभा परिसर में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया था। बाद में संसदीय कार्य मंत्री ने चौकीदार संघ से जुड़े सवालों का जवाब दिया। पूरे घटनाक्रम ने बजट सत्र के अंतिम दिनों में राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।