पटना: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद नौकरी और रोजगार दिए जाने की बातें सरकार में बैठे लोगों के द्वारा लगातार किया जा रहा है। इस बीच मंगलवार को शिक्षा विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर बहाली कर हटाये गए कर्मी राजधानी पटना में स्थित भाजपा कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करने पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार एक तरफ नौकरी देने की बात करती है और दूसरी तरफ हम लोगों की नौकरी वापस ले ली गई है। यह हमारे साथ अन्याय से कम नहीं है।
लोगों ने कहा कि बिहार सरकार और शिक्षा विभाग ने पहले नोटिफिकेशन जारी किया जिसके बाद बिहार के बाहर विभिन्न कंपनियों में नौकरी कर रहे तीन हजार लोगों ने बिहार में आ कर अप्लाई किया। उस दौरान IAS स्तर के अधिकारियो ने सभी का इंटरव्यू लिया और 3 हजार में से मात्र 6 सौ लोगों को चयनित कर विभिन्न पदों पर उनका योगदान लिया गया। योगदान के वक्त हमलोगों को 5 वर्षों के लिए नियुक्त किया गया था लेकिन महज डेढ़ वर्षों में ही कहा गया कि आपलोगों की नियुक्ति फर्जी है और हटा दिया गया।
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लोगों ने कहा कि एक तरफ सरकार नौकरी और रोजगार देने की बात करती है और दूसरी तरफ हमलोगों से रोजगार छीन ली गई है। हमलोग अपनी नियुक्ति के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं लेकिन हमें आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिल रहा है। हमलोगों ने काफी पैसे खर्च कर बीटेक और MBA जैसी पढाई की, फिर अपने राज्य में नौकरी करने के लिए दूसरे राज्यों से नौकरी छोड़ कर आये और यहां हमें सरकारी महकमे के द्वारा ही छला गया है। अगर सरकार हमें वापस से नियुक्त नहीं करती है तो हमलोग भटकने के लिए मजबूर हैं।
वहीं भाजपा कार्यालाय पहुँचने के मामले में लोगों ने कहा कि और कहां जायेंगे हमलोग। हमलोग मंत्री और अधिकारियों के चक्कर लगा कर अब थक गए हैं लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अगर सरकार हमारी नहीं सुनेगी तो फिर कौन सुनेगा और ऐसा भी नहीं है कि हमलोग गलत मांग कर रहे हैं बल्कि सरकार के नोटिफिकेशन के आधार पर ही हमलोग को नियुक्त किया गया था फिर डेढ़ वर्षों में ही क्यों हटा दिया गया।
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