पटना: बीते दिनों बलात्कार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप लगने की वजह से चर्चा में आये बिहार के IAS अधिकारी संजीव हंस की कथित पत्नी अपने बेटे के साथ शनिवार को शास्त्रीनगर थाना पहुंची। शास्त्रीनगर थाना में उन्होंने पुलिस से मांग की कि उसके बच्चे को अपने पिता से मिलने दिया जाये। इस दौरान दर्श न्यूज़ से खास बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि संजीव हंस को कोर्ट ने बलात्कार के मामले में बरी जरुर कर दिया लेकिन कोर्ट ने माना है कि उनका मेरे साथ संबंध हैं।
IAS संजीव हंस की कथित पत्नी ने कहा है कि कोर्ट ने और उन्होंने खुद भी माना है कि बच्चा उनका है और उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। वे लोग मामला को दबाने के लिए मुझे रूपये पैसे का प्रलोभन देते रहे हैं लेकिन मुझे कोई रूपये पैसे नहीं चाहिए बल्कि अपने बच्चे की अच्छी परवरिश चाहिए। मुझे उनसे मिलना भी नहीं है, बल्कि बच्चा अब बड़ा हो गया है और उसका कहना है कि नए वर्ष के अवसर पर पिता से मिलना है। इसलिए हमदोनो मां बेटा उनके पुराने आवास पर गए जहां अलग अलग लोगों ने अलग अलग बातें कहीं और वे मुझसे नहीं मिले।
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महिला ने कहा कि यह पूरी दुनिया जानती है कि संजीव हंस का मेरे साथ क्या रिश्ता रहा है और वे अब इसे छुपा नहीं सकते हैं। उन्होंने कहा कि FIR में देरी की वजह से कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया लेकिन सच्चाई छुपाई नहीं जा सकती है। मैं संजीव हंस से जिन मोबाइल नंबर पर बात करती थी अभी वह नंबर बंद है। इसलिए मैं उनके आवास पर गयी और वहां अलग अलग लोगों ने मेरे साथ अलग अलग झूठ बातें की। जब मैं उनसे नहीं मिल सकी तब मैं शास्त्रीनगर थाना में पहुंची हूँ और पुलिस अधिकारी से मांग की हूँ कि मुझे संजीव हंस से मिलवाया जाये। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामला अभी कोर्ट में है और कोर्ट के आदेश के आधार पर ही हमलोग कुछ कर सकते हैं। हम अपनी तरफ से संजीव हंस को मिलने के लिए नहीं कह सकते हैं। उन्होंने बताया कि मैंने प्रयागराज में मेंटेनेंस के लिए कोर्ट में एक अर्जी दायर कर रखी है जिसका इन लोगों ने नोटिस रिसीव नहीं किया।
महिला ने संजीव हंस को दुबारा जिम्मेवारी मिलने के मामले में कहा कि मैं अभी अपनी लड़ाई लड़ रही हूँ और मुझे उनके किसी अन्य व्यक्तिगत मामलों से मतलब नहीं है। मेरे ही मामले की वजह से वे एक्सपोज हुए और ED ने कार्रवाई की। जेल से आये उन्हें 3 महीने से अधिक हो गया, उन्हें अपने बच्चे से बात करनी चाहिए थी। अब जब बच्चा मिलने आया है तो वे उससे मिल नहीं रहे हैं। फ़िलहाल मुझे कोर्ट पर भरोसा है और देखना है कि मुझे कब तक न्याय मिलता है।
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पटना से चंदन तिवारी की रिपोर्ट