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मेंढक हैं राज ठाकरे, मुंबई चुनाव को लेकर बिहार में क्यों गर्म हो गई सियासत?

मुंबई चुनाव को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर हिंदी भाषियों को लेकर विवादित बयान दिया है. राज ठाकरे के इस बयान के बाद अब बिहार में भी राजनीति शुरू हो गई है. एक तरफ जहां जदयू भाजपा ने विरोध किया तो दूसरी तरफ राजद ने...

Politics heats up in Bihar over the Mumbai elections.
मुंबई चुनाव को लेकर बिहार में गरमाई सियासत, राज ठाकरे के बयान पर बिहार में...- फोटो : Darsh News

पटना: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में नगर निगम का चुनाव सर पर है और इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज है। इस सरगर्मी के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर यूपी-बिहार के लोगों के लिए विवादित बयान दिया है। उन्होंने एक बार फिर महाराष्ट्र में हिंदी भाषियों को चेतावनी दी और कहा कि मराठी लोगों की हक और जमीन दोनों छिनी जा रही है और ऐसा हम नहीं होने देंगे।

राज ठाकरे ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हम हिंदी भाषा के विरोध में नहीं हैं लेकिन अगर इसे जबरन थोपने की कोशिश की गई तो फिर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि यूपी बिहार के लोगों को समझना चाहिए कि हिंदी महाराष्ट्र की भाषा नहीं है। हर तरफ से लोग यहां आ रहे हैं और स्थानीय लोगों की जमीन तथा हिस्सा छीन रहे हैं। ये दोनों अगर चला गया तो भी मराठी का अस्तित्व खत्म हो जायेगा। उन्होंने मराठी लोगों से अपील की कि यह मराठी मानुष का आखिरी चुनाव है और वक्त है एकजुट होने का तथा वोट करने का। राज ठाकरे के इस बयान के बाद एक बार फिर से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और यूपी बिहार के नेताओं ने विरोध किया।

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मेंढक हैं राज ठाकरे

राज ठाकरे के बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा ने हल्का और छिछले स्तर का बयान बताया। भाजपा के प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने कहा कि मुंबई में चुनाव की वजह से राज ठाकरे इस तरह का बयान दे रहे हैं। हिंदी और हिंदी भाषियों का महाराष्ट्र और मराठी मानुष से पुराना संबंध है। बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले से लेकर पूजनीय बाला साहेब तक हर व्यक्ति ने हिंदी और हिंदी मानुष के लिए दिल में बहुत ही गर्मजोशी रखा है। आज की सरकार के मुख्यमंत्री देवेंद्र भाई भी ऐसा ही कर रहे हैं। कोई किसी का हक नहीं मारता है, भारत में इस बात की स्वतंत्रता है कि हर हिन्दुस्तानी देश के किसी भी हिस्से में काम कर सकता है, इसलिए न तो हिंदी भाषी को महाराष्ट्र में डरने की आवश्यकता है और न ही मराठी मानुष को यूपी बिहार में डरने की जरूरत है। राज ठाकरे तो चुनावी मेढक हैं और हर चुनाव में ऐसी भाषा बोलते हैं। इनकी बोली मेढक की टर्र टर्र की तरह है।

हिंदी हमारी मातृभाषा

वहीं दूसरी तरफ जदयू ने भी राज ठाकरे के बयान पर पलटवार किया है। जदयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि हम भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में रहते हैं जहां क्षेत्रवाद को किसी भी कीमत पर बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है। हमने पहले भी देखा है कि राज ठाकरे की तरफ से भड़काऊ बयान दिये जाते हैं तो हम उन्हें चेता देते हैं कि अगर इस तरह से देश की अखंडता पर चोट करने की कोशिश करेंगे और किसी को धमकी देंगे तो यह नहीं चलने वाला है। हिंदी हमारी मातृभाषा है और आपको हिंदी से अगर इतना ही नफरत है तो मुझे लगता है कि एफिटडेविट के माध्यम से यह कहना चाहिए। देश के लोग किसी भी कोने में जा कर रह सकते है और काम भी कर सकते हैं।

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भाजपा को आना चाहिए आगे

इसके साथ ही राजद ने भी इस मामले में बड़ा बयान दिया है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि इस मामले में महाराष्ट्र की सरकार को देखना चाहिए। भाजपा जो दावा करती है कि हम बिहार और बिहारियों के अपमान को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे और जिस तरह उनके शासन में बिहारियों का अपमान हो रहा है तो भाजपा और उनकी महायुती सरकार क्या कर रही है। मुंबई चुनाव को लेकर इस तरह का खेल हो रहा है लेकिन उन्हें एक बात समझना चाहिए कि बिहार के लोग देश की तकदीर और तस्वीर लिखने वाले हैं। जो लोग इस तरह की भाषा बोल कर सोचते हैं कि डरा देते हैं वह ग़लतफ़हमी में हैं और इस तरह का बयान देने वाले कभी राजनीति में स्थापित नहीं हो सकते हैं।

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