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ऑटो पर अनिवार्य QR कोड, पर ड्राइवर बोले—हमें तो पता ही नहीं! पटना में उड़ रही है नियमों की धज्जियां

जनवरी 2026 से ऑटो और ई-रिक्शा पर QR कोड और पुलिस कोड अनिवार्य किए जाने के बावजूद पटना में जमीनी हकीकत अलग दिख रही है।

Rules are being flouted in Patna
ऑटो पर अनिवार्य QR कोड, पर ड्राइवर बोले—हमें तो पता ही नहीं! पटना में उड़ रही है नियमों की धज्जियां- फोटो : Darsh NEWS

जनवरी 2026 से बिहार सरकार ने ऑटो और ई-रिक्शा पर QR कोड तथा पुलिस कोड अनिवार्य करने का आदेश लागू किया था। मकसद साफ था—यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करना और ऑटो लुटेरा गिरोह पर लगाम लगाना। लेकिन राजधानी पटना में जब इस व्यवस्था की पड़ताल की गई तो हालात सरकारी दावों से मेल खाते नजर नहीं आए। शहर के विभिन्न इलाकों में की गई जांच में बड़ी संख्या में ऑटो बिना QR कोड और पुलिस कोड के चलते दिखे। कई चालकों से बातचीत में सामने आया कि उन्हें इस नई व्यवस्था की स्पष्ट जानकारी ही नहीं है। कुछ ड्राइवरों ने कहा कि उन्हें न तो किसी प्रशासनिक अधिकारी ने सूचित किया और न ही यूनियन की ओर से कोई लिखित निर्देश मिला।

नियम के अनुसार, प्रत्येक ऑटो के आगे-पीछे पुलिस कोड अंकित होना चाहिए। उल्लंघन की स्थिति में जुर्माने और वाहन जब्ती तक का प्रावधान है। इसके बावजूद अधिकतर वाहनों पर कोड नहीं मिला। इससे नियमों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत शहर को अलग-अलग रंग आधारित जोन—पीला, नीला, हरा, भूरा और सफेद—में बांटा गया है। हर जोन के लिए निर्धारित रूट और पार्किंग स्थल तय किए गए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर न तो रंग कोड स्पष्ट दिखे और न ही अधिकांश चालकों को अपने जोन की सटीक जानकारी थी।

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QR कोड स्कैन करने पर चालक का नाम, लाइसेंस विवरण, वाहन रजिस्ट्रेशन और रूट जैसी जानकारी मिलने का दावा किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इससे अपराध की स्थिति में तुरंत ट्रैकिंग संभव होगी। पटना में करीब 30 हजार ऑटो संचालित होते हैं। ऐसे में डिजिटल निगरानी प्रणाली तभी कारगर होगी जब व्यापक जागरूकता अभियान और सख्त मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। फिलहाल, कागजों पर सख्ती और सड़कों पर ढिलाई के बीच व्यवस्था अधर में नजर आ रही है।


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