बिहार में अब बकरीपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नए कदम उठाए हैं। राज्य में सुधा बूथों के माध्यम से बकरी का दूध बिकेगा, जबकि बकरा मांस नगर निगम और नगर निकायों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। शुरुआत में यह योजना भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और पूर्णिया जैसे शहरों में लागू होगी। इसके लिए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
विभाग के सचिव शीर्षत कपित अशोक ने बताया कि सभी पंचायतों में सुधा बूथ स्थापित किए जाएंगे और राज्य में गोट फेडरेशन का गठन होगा। प्रत्येक जिले में गोट स्पेशलिस्ट नियुक्त किए जाएंगे, जिन्हें मथुरा स्थित संस्थान में विशेष प्रशिक्षण भी मिलेगा। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा, बकरीपालन के वैज्ञानिक मार्गदर्शन के लिए थिंक टैंक के रूप में काम करेंगे।
गरीब परिवारों को आर्थिक मदद देने के लिए सरकार बकरीपालन पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। बीपीएल परिवारों को तीन प्रजनन योग्य बकरियों का वितरण किया जा रहा है। अब तक 34 हजार 218 परिवारों को 1,02,654 बकरियां मिल चुकी हैं। देश में कुल बकरियों की संख्या लगभग 12 करोड़ है, जिनमें से बिहार में 1.28 करोड़ बकरियां हैं। हाल ही में गया में गोट सिमेन बैंक स्थापित करने की योजना को मंजूरी दी गई है, जिससे नस्ल सुधार और मेमनों की मृत्यु दर में कमी आएगी।
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इसके अलावा पटना के गांधी मैदान में 12 से 15 मार्च तक राज्यस्तरीय कृषि यांत्रिकीकरण मेला आयोजित किया जाएगा। इसमें देशभर के कृषि यंत्र निर्माता भाग लेंगे और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक और उपकरणों से अवगत कराया जाएगा। मेले में पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के उत्पादक भी शामिल होंगे। करीब 3.25 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में यह मेला 100 से अधिक स्टॉल के साथ आयोजित होगा। यह कदम बकरीपालन और कृषि यंत्रीकरण दोनों के क्षेत्र में विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।