गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इस बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। बीएसई सेंसेक्स लगभग 780 अंक टूटकर 84 हजार के नीचे बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 1 फीसदी से ज्यादा गिरावट के साथ बंद हुआ। अगर पिछले चार कारोबारी दिनों की बात करें तो सेंसेक्स करीब 1600 अंक और निफ्टी लगभग 400 अंक तक गिर चुका है।
बाजार में इस कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में पेश किया गया एक नया बिल माना जा रहा है। इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इस फैसले को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
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इस संभावित फैसले काअसर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर पड़ सकता है। इसी डर की वजह से निवेशकों में घबराहट देखने को मिली और बाजार में जमकर बिकवाली हुई। रिलायंस, टीसीएस, एलएंडटी, इंफोसिस, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक और टाटा स्टील जैसे बड़े शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
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बाजार की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैकड़ों शेयर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने कुछ हद तक खरीदारी की, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली ने बाजार पर दबाव बना दिया। अब निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों और अमेरिका के फैसलों पर टिकी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।