पटना: बिहार में नई सरकार बनने के बाद एक तरफ सरकार में बैठे लोग माफियाओं और भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का दावा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ निगरानी विभाग की टीम भी लगातार इस दिशा में काम कर रहा है। इसी कड़ी में अब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी तैयारी कर ली है जिसके तहत राज्य के आठ भ्रष्ट अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मामले की जानकारी देते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जेएस गंगवार ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में वर्ष 2025 की जानकारी के आधार पर आठ भ्रष्ट अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की करीब 4.14 करोड़ रूपये की अविध संपत्ति को जब्त करने संबंधी प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही इस दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
निगरानी के डीजी जेएस गंगवार ने बताया कि फ़िलहाल निगरानी ने दो तत्कालीन मुखिया, एक तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक फ़ॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक SDO, एक टैक्स दारोगा और एक CDPO शामिल हैं। इन सभी के विरुद्ध वर्ष 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किये गए थे। इन सभी के पास करीब 4.14 करोड़ रूपये से अधिक की अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति है जिसे जब्त करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
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डीजी ने बताया कि लखीसराय के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार के खिलाफ वर्ष 2012 में मामला दर्ज हुआ था। उनकी 88 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति राज्यसात करने का प्रस्ताव है। वहीं गोपालगंज के हथुआ में एसडीओ रहे विजय प्रताप सिंह की 62 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त करने की तैयारी है। वे अपर समाहर्ता और दरभंगा प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में आयुक्त के सचिव पद पर भी कार्यरत रह चुके हैं। इनके खिलाफ 2015 में भ्रष्टाचार के तीन मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा, पटना ग्रामीण की तत्कालीन सीडीपीओ फूलपरी देवी, मोतिहारी नगर परिषद के टैक्स दारोगा रहे अजय कुमार गुप्ता, और समस्तीपुर जिले के जितवारिया ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया प्रमोद कुमार राय भी सूची में शामिल हैं। इन सभी की 61 लाख रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त किए जाने की प्रक्रिया में हैं।
वर्ष 2016 में ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी तथा पश्चिम चंपारण के लौरिया प्रखंड अंतर्गत राजमारहिया पकड़ी पंचायत के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव के खिलाफ भी कार्रवाई प्रस्तावित है। मैनेजर यादव की 1.70 करोड़ रुपये की संपत्ति को राज्यसात करने की अनुशंसा की गई है। ओमप्रकाश मांझी को पहले ही सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। निगरानी ने जुलाई 2019 में दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। उनकी 41.12 लाख रुपये की संपत्ति जब्ती के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अब तक 119 मामलों में 96.76 करोड़ रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें से 66 मामले (57 करोड़ रुपये) सक्षम प्राधिकार की अदालत में लंबित हैं, जबकि 32 मामले (20.80 करोड़ रुपये) उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। दो मामले सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के रूप में दर्ज हैं और दो मामलों में विपक्षी पक्ष की अपील के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है।
इनके विरुद्ध निगरानी की कार्रवाई है जारी
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