Delhi :- बीजेपी की एक महत्वाकांक्षी बिल आज लोकसभा में पेश की गई. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन बिल पेश किया है, इसके बाद पक्ष और विपक्ष की तरफ से इस बिल पर चर्चा की जा रही है. लोकसभा अध्यक्ष ने इस पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किया है, जिसमें करीब 5 घंटा सत्ताधारी दल के लिए और 3 घंटा विपक्षी दलों के सांसदों को बोलने के लिए रखा गया है. कांग्रेस के सांसदों द्वारा यह आपत्ति की गई कि उन्हें बिल की कॉपी काफी देर से मिली है. इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई है.
बताते चलें कि इस बिल को भाजपा के साथ ही अब सहयोगी दल जदयू तेलुगूदेशम और अन्य दलों का भी समर्थन मिल गया है जिससे इस बिल के पास होने में अब किसी तरह की दिक्कत होने की संभावना नहीं है, वहीं विपक्षी दल संख्या बल में काम होने के बावजूद इस बिल का विरोध कर रहे हैं. गौरतलब है कि इस संशोधन बिल पर सदन के नेता यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नहीं बोलेंगे, बल्कि दोनों गठबंधन की ओर से अलग-अलग सांसदों को बोलने की जिम्मेदारी पार्टी की तरफ से दी गई है..
किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक कार्यकलाप में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है. हम किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे. इस पर विपक्ष की ओर से किसी ने टिप्पणी की. स्पीकर ओम बिरला ने टोकते हुए नसीहत दी कि भारत की संसद में बैठे हो, गरिमा का ध्यान रखो. किसी भी व्यक्ति को बैठे-बैठे टिप्पणी का अधिकार नहीं है. किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि ये मस्जिद या धार्मिक क्रियाकलापों से जुड़ा मामला नहीं है. ये बस एक संपत्ति के मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है. कोई मुसलमान जकात देता है तो उसे पूछने वाले हम कौन होते हैं. हम तो बस उसके मैनेजमेंट से जुड़ी बात कर रहे हैं. इसका धार्मिक व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है.