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दिल्ली में सांस लेना भी हुआ मुश्किल, जहरीली हवा से नोएडा का AQI पहुंचा 688

देश की राजधानी दिल्ली में बीते कुछ दिनों से प्रदूषण में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. राजधानी दिल्ली और आस-पास के इलाकों में बढ़ता प्रदूषण खतरे की घंटी बजा रहा है. दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद समेत एनसीआर के इलाकों में हवा की गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत खराब श्रेणी में है. सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक आज यानी सोमवार, 30 अक्टूबर को सुबह 7:30 बजे 324 दर्ज किया गया जो बहुत खराब श्रेणी में आता है.

वहीं, सुबह 8 बजे नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 688 रिकॉर्ड किया गया है. बता दें कि बीते दिन दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में सुबह 8 बजे के करीब 566 AQI दर्ज किया गया था, जो बहुत खराब कैटेगरी में आता है. प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए सरकार की ओर से कई एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन प्रदूषण की स्थिति में सुधार होता दिखाई नहीं दे रहा है. 

रविवार को दो इलाकों में यह गंभीर श्रेणी में पहुंच गया. जहांगीरपुरी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 412 रहा, वहीं नेहरू नगर में 403 दर्ज किया गया. मुंडका इलाके में भी प्रदूषण गंभीर स्थिति के करीब रहा. यहां एक्यूआई 392 दर्ज किया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में अगले तीन दिन तक हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में रह सकती है.

पूर्वानुमान के अनुसार, अगले कुछ दिन दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम होने की संभावना नहीं है. दरअसल, हवाओं की धीमी रफ्तार, हवा में अधिक नमी की वजह से इस समय प्रदूषण बढ़ रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन दिन तक राजधानी में प्रदूषण बेहद खराब श्रेणी में ही बना रहेगा. वहीं, छह दिनों के भीतर प्रदूषण बेहद खराब श्रेणी या खराब श्रेणी के बीच में रहेगा. फिलहाल, प्रदूषण में कमी आने की संभावना नहीं है. रविवार को हवा दक्षिण-पूर्व एवं उत्तर-पूर्व दिशा से चली. इसकी रफ्तार भी 4 से 8 किलोमीटर रही, जिसके चलते प्रदूषक कणों का बिखराब नहीं हो सका. पंजाब एवं हरियाणा में जलाई जा रही पराली के चलते अगले 10 से 15 दिन तक प्रदूषण से राहत मिलने की संभावना नहीं है.

बता दें कि हर साल नवंबर के महीने में प्रदूषण के कारण दिल्ली-एनसीआर गैस चैंबर बन जाता है. इस साल भी स्थिति ने निपटने के लिए अक्टूबर से ही दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रेस्‍पांस एक्‍शन प्‍लान (GRAP) स्टेज 1 और 2 लागू कर दिया गया है लेकिन फिर भी दिवाली के बाद स्थिति गंभीर होने की संभावना है. 

एक नवंबर से डीजल बसों पर पाबंदी

वहीं, राजधानी में एक नवंबर से डीजल बसों के प्रवेश पर पाबंदी रहेगी. एनसीआर राज्यों से केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस-6 मानक वाली बसें ही दिल्ली आ सकेंगी. इसे लेकर वायु गुणवत्ता आयोग के आदेश पर परिवहन विभाग द्वारा सर्कुलर जारी किया गया.

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने रविवार को कश्मीरी गेट बस अड्डे पर बस चालकों को इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बुधवार से दिल्ली के सभी प्रवेश मार्गों पर प्रदूषित ईंधन से संचालित बसों के खिलाफ परिवहन विभाग जांच अभियान चलाएगा. गोपाल राय ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कश्मीरी गेट बस अड्डे का औचक निरीक्षण किया. उन्होंने बताया कि दिल्ली में अभी गाड़ियों से प्रदूषण ज्यादा हो रहा है. दिल्ली में सभी बसें सीएनजी पर चल रही हैं. साथ ही, 800 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें भी चल रही हैं, लेकिन यूपी, हरियाणा और राजस्थान से आने वाली बीएस-3 और बीएस- 4 डीजल बसों के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है.

उन्होंने आईएसबीटी में निरीक्षण के दौरान पाया कि यूपी और हरियाणा से आने वाली सभी बसें बीएस-3 और बीएस- 4 हैं. वहां से आने वाली कोई भी बस इलेक्ट्रिक या सीएनजी पर नहीं चल रही है. उन्होंने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया है कि वह हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में संचालित होने वाली इन बसों को प्रतिबंधित करें.

कूड़ा जलाने वालों पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण काफी बढ़ रहा है. नवंबर के दूसरे सप्ताह में दिवाली भी है. ऐसे में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण को लेकर सख्त कार्रवाई करने की रणनीति बनाई है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा निर्धारित श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रैप) के तहत निगम हर श्रेणी में सख्त कार्रवाई करेगा. खुले में कूड़ा जलाने पर कर्मचारी 200 रुपये से 50 हजार रुपये तक का चालान काटते हैं. वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूरी दिल्ली में प्रदूषण की रोकथाम को लेकर दो से चार सप्ताह के दौरान सख्त कार्रवाई की जाएगी. दो हजार से अधिक कर्मचारियों की टीमें हर वार्ड में सर्विलांस करेंगी. कूड़ा जलाने व अन्य पदार्थों पर आग लगाने की घटनाओं को रोकने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे.

बता दें कि शून्य से 50 के बीच AQI अच्छा, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच AQI ‘गंभीर’ माना जाता है. 

दिवाली पर गंभीर होगी समस्या!

जानकारों की मानें तो हवा में धूल के कण, कार्बन मोनो ऑक्साइड की मौजूदगी मानकों से कई गुना ज्यादा है. वहीं, पटाखों पर पाबंदी के बावजूद त्योहारों पर आतिशबाजी भी देखने को मिलती है. कुछ दिन बाद ही दिवाली है, ऐसे में साफ है कि आने वाले दिनों में एयर क्वालिटी और खराब हो सकता है. मौसम की बात करें तो दिल्ली में पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली में नवंबर के पहले सप्ताह में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रह सकता है.