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खेलेंगी बेटियां, तभी तो खिलेंगी बेटियां, बिहार की ट्रॉफी लेकर आएँगी बिहार तो BCA करेगा...

खेलेंगी बेटियां, तभी तो खिलेंगी बेटियां, यह सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, ये बिहार की उन आँखों की जीत है जिन्होंने बड़े सपने देखने की हिम्मत की। यह कहानी 11 खिलाड़ियों की नहीं है। यह कहानी उन हज़ारों पसीनों की बूंदों की है जो बिहार की तपती धूप में मैदानों पर..

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खेलेंगी बेटियां, तभी तो खिलेंगी बेटियां, बिहार की ट्रॉफी लेकर आएँगी बिहार तो BCA करेगा...- फोटो : Darsh NEWS

खेलेंगी बेटियां, तभी तो खिलेंगी बेटियां, यह सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, ये बिहार की उन आँखों की जीत है जिन्होंने बड़े सपने देखने की हिम्मत की। यह कहानी 11 खिलाड़ियों की नहीं है। यह कहानी उन हज़ारों पसीनों की बूंदों की है जो बिहार की तपती धूप में मैदानों पर सपनों को सींचती रहीं। यह कहानी उन पिताओं की है जिन्होंने समाज की परवाह किए बिना अपनी बेटियों के हाथों में बल्ला थमाया, और उन माताओं की है जिन्होंने गुपचुप तरीके से उनकी किट बैग तैयार की

कटक: मैदान पर सन्नाटा था, लेकिन बिहार की खिलाड़ियों के दिलों में एक शोर था—दशकों के संघर्ष को एक पहचान देने का शोर। जब खुशबू सी. कुमारी ने गेंद थामी, तो वह सिर्फ विकेट नहीं चटका रही थीं, वह उन तमाम बाधाओं को उखाड़ रही थीं जो बिहार की महिला क्रिकेट के रास्ते में खड़ी थीं। उनके 5 विकेट सिर्फ आंकड़े नहीं, एक दहाड़ थे।

जब कप्तान प्रगति सिंह और वैदेही यादव क्रीज पर डटी थीं, तो उनके कंधों पर सिर्फ रन बनाने की जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि पूरे बिहार की उम्मीदों पर खरे उतरने की ललकार थी और जब अपूर्वा कुमारी को 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया, तो वह केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं थी, बल्कि उस निरंतरता (Consistency) की जीत थी जो उन्होंने मैदान पर अपनी प्रभावी भूमिका में निभाई। इस पूरे टूर्नामेंट में सबको डोमिनेट करके हारने की करतब करने वाली हुनरबाज बिहार की बेटियों के पीछे का राज क्या था जो इन बेटियों को निडर-निर्भीक बनाकर एक नई ऊर्जा और पुरे साहस भरे हौसले के साथ मैदान पर उतार रहा था।

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परदे के पीछे के असली नायक: BCA मैनेजमेंट

एक खिलाड़ी तभी निडर होकर खेलता है जब उसे पता हो कि उसके पीछे एक मजबूत दीवार खड़ी है। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) का मैनेजमेंट वही दीवार बना। अध्यक्ष हर्ष वर्धन और सचिव ज़िआउल आरफीन ने केवल दफ्तर से निर्देश नहीं दिए, बल्कि उन्होंने इन बेटियों के लिए एक 'इकोसिस्टम' तैयार किया। जब खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाओं की जरूरत थी, मैनेजमेंट खड़ा रहा। जब उन्हें मानसिक मजबूती और सही मार्गदर्शन चाहिए था, एसोसिएशन ने मुहईया कराया तथा खिलाड़ियों के अनुरूप संसाधन दिए। BCA अध्यक्ष और सचिव का वह विजन कि "हमारी बेटियां रुकेंगी नहीं", आज धरातल पर सच साबित हुआ है। मैनेजमेंट का यह भरोसा ही था जिसने टीम को इस पूरे टूर्नामेंट में 'अजेय' (Undefeated) बनाए रखा। जब लीडरशिप खिलाड़ियों के साथ एक परिवार की तरह खड़ी होती है, तो परिणाम ऐसे ही ऐतिहासिक होते हैं।

बिहार का एक नया सवेरा

कल जब ये बेटियां ट्रॉफी लेकर बिहार की धरती पर कदम रखेंगी, तो वे सिर्फ 'खिलाड़ी' नहीं होंगी। वे प्रेरणा होंगी उन बच्चियों के लिए जो आज अपने घर के आंगन में प्लास्टिक के बल्ले से खेल रही हैं। यह जीत हमें सिखाती है कि साधन कम हो सकते हैं, लेकिन यदि इरादे और मैनेजमेंट का साथ पक्का हो, तो आसमान छूना मुश्किल नहीं। बधाई हो टीम बिहार.. आपने साबित कर दिया कि बिहार की मिट्टी में वो जिद है, जो इतिहास बदल देती है। बिहार की चैंपियन बेटियों के लिए कल बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में सम्मान समारोह की तैयारी की गई है। BCA से प्राप्त जानकारी के अनुसार कल पूरी टीम को कार्यालय परिसर में सम्मानित किया जाएगा। BCA अध्यक्ष का कहना है कि 'खेलेंगी बेटियां, तभी तो खिलेंगी बेटियां।'

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