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बच्चों के स्ट्रेस को कम करने के लिए बड़ा कदम, साल में दोनों बार बोर्ड एग्जाम देना जरूरी नहीं

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बच्चों के परीक्षाओं से जुड़ी बड़ी घोषणा की. केंद्रीय शिक्षा मंत्री के मुताबिक, छात्रों के लिए साल में दो बार कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा देना अनिवार्य नहीं होगा. बता दें कि, नई शिक्षा नीति के अंतर्गत हाल ही में साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की गई थी. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अगस्त में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप स्कूली शिक्षा के लिए नया पाठ्यक्रम ढांचा लॉन्च किया था. जिसके बाद अब दो बार बोर्ड एग्जाम देना अनिवार्य नहीं होगा. 

बच्चों के स्ट्रेस को कम करने के लिए उठाया कदम 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि, "छात्रों के पास इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई की तरह साल में दो बार यानी कि 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठने का विकल्प होगा. वे बेस्ट स्कोर चुन सकते हैं. लेकिन, यह पूरी तरह से वैकल्पिक होगा, कोई बाध्यता नहीं होगी. क्योंकि छात्र अक्सर यह सोचकर स्ट्रेस ले लेते हैं कि उनका एक साल बर्बाद हो गया, उनका मौका चला गया या वे बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे. इसलिए केवल एक मौके के डर से होने वाले तनाव को कम करने के लिए साल में दो बार बोर्ड एग्जाम का ऑप्शन दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि, "अगर किसी छात्र को लगता है कि वह पूरी तरह से तैयार है और परीक्षा के पहले सेट के स्कोर से संतुष्ट है, तो वह अगली परीक्षा में शामिल न होने का विकल्प चुन सकता है. कुछ भी अनिवार्य नहीं होगा." 

2024 से नई व्यवस्था के तहत परीक्षा संभव 

अगस्त में शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) के अनुसार, बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों के पास अच्छा प्रदर्शन करने के लिए पर्याप्त समय और अवसर हो और उन्हें सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाए रखने का विकल्प मिले. केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि, साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की योजना पर उन्हें छात्रों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. न्यू करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) की घोषणा के बाद मैं छात्रों से मिला. उन्होंने इसकी सराहना की है और इस विचार से खुश हैं. हम कोशिश कर रहे हैं कि 2024 से साल में दो बार परीक्षाएं आयोजित की जाएं.