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मार्च तक बिहार में होगा भू-माफियाओं का अंत, डिप्टी सीएम ने कहा 'अब होगा सबका हिसाब'

मार्च तक भू-माफिया का अंत! विजय सिन्हा का वादा। बालू के बाद भू-माफिया की बारी, मार्च तक हिसाब, जुर्माना रूल। मार्च तक भूमि माफिया का 'खात्मा'! विजय सिन्हा का धमाका – जेल हटाकर जुर्माना, शहरों में नई क्रांति। बिहार में सक्रिय भूमि माफिया का मार्च तक

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मार्च तक बिहार में होगा भू-माफियाओं का अंत, डिप्टी सीएम ने कहा 'अब होगा सबका हिसाब'- फोटो : Darsh News

बिहार में सक्रिय भूमि माफिया का मार्च तक कर दिया जाएगा हिसाब– विजय सिन्हा

पटना: उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार के शहरी विकास में भूमि माफिया एक नई चुनौती के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री के रूप में मुझे इस चुनौती को नजदीक से देखने का अवसर मिला है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सबसे अधिक विवाद जमीन से जुड़े झगड़ों का है। इंच-इंच जमीन के लिए लोग अपने ही भाई का लहू बहाने को तैयार हैं। हमने इसे रोकने के लिए सभी अंचलों में अंचल गार्ड की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि राज्यभर में सक्रिय जमीन माफिया का अगले मार्च तक हिसाब कर दया जाएगा। 

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा रविवार को राजधानी के तारामंडल के सभागार में “स्टैकहोल्डर कंसल्टेशन ऑन टाउन प्लानिंग स्कीम” विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर पटना की मेयर श्रीमती सीता साहू, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, सचिव संदीप कुमार पुडुलकट्टी, पटना के नगर आयुक्त अनिमेष पराशर समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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इस कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि हमने इनसे निपटने की शुरुआत भूमि सुधार एवं जन कल्याण संवाद के जरीय कमिश्नरी स्तर पर की है। अभी हमारा लक्ष्य जमीन की मापी कराकर उनके परिमार्जन को ठीक करना है। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान में जो भी अडंगा लगाएंगे, उन्हें ठीक कर दिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में तीन प्रकार के माफिया सक्रिय हैं। पहला भूमि माफिया, दूसरा बालू माफिया और तीसरा शराब माफिया। बालू माफिया का तो इलाज कर कर दिया गया है और अब भूमि माफिया की बारी है। इनका भी मार्च तक इलाज कर दिया जाएगा। उधर, शराब माफिया का इलाज उप मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी कर रहे हैं।   

उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि लोग रोजगार और बेहतर जीवनशैली के लिए शहरों का रुख करते हैं। आज देश की 36 प्रतिशत आबादी शहरी हो चुकी है। जबकि बिहार कि करीब 16.6 फीसद आबादी ही शहरों में रहती है। यह चिंता का विषय है। हमारी नई सरकार ने अपने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही फैसला लिया है कि राज्य में 11 नए टाउनशिप व्विक्सित किये जाएंगे। इनमें नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों के अलावा सोनपुर और सीतामढ़ी को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार को पूर्वी भारत का टेक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए डिफेन्स कोरिडोर के साथ सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित किये जाएंगे।  उनोने कहा कि भविष्य का शहर कैसा होगा, इसपर हमें विचार करना होगा।   

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डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि बिहार में शहरीकरण की रफ़्तार में तेजी लाई जा रही है। पहले लोग नरसंहार से बचने के लिए शहरों का रुख करते थे। लेकिन बिहार के गांवों में आधारभूत संरचना विकसित हो चुकी है। लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था की समस्या को लेकर गांवों से पलायन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर तभी समृद्ध हो सकता है जब गांव भी विकसित हों। ब्बिहर के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा सेवा को बेहतर बनाया जा रहा है। कार्यशाला में आए अतिथियों का स्वागत करते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमा ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार का तेजी से विकास हो रहा है। लेकिन राज्य के शहरी क्षेत्रों में इसकी रफ़्तार संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बिहार टाउन प्लानिंग नीति 2025 की चर्चा करते हुए कहा कि बिल्डिंग बाईलॉज़ में बदलाव कर उसे सरल बनाया जाएगा। अब बिल्डिंग बाइलॉज़ का उल्लंघन करने वालों को जेल की सजा के बदले आर्थिक दंड देने का प्रावधान किया जा रहा है।

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