पटना: बिहार की पुलिस अक्सर अपने कारनामों की वजह से चर्चा में रहती है और हर बार उसकी खिल्ली ही उडती है। एक बार फिर ऐसा ही एक मामला सामने आया है जब बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक को दरकिनार कर दिया और अपनी मनमर्जी की। हालांकि इस संबंध में अब संबंधित जिलों को एक बार फिर से निर्देश जारी किया गया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई के लिए कहा गया है।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार या पोक्सो एक्ट, आतंकवादी मामलों और अन्य ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट से संबंधित FIR को प्रतिबंधित FIR की श्रेणी में रखा है और पुलिस को निर्देश जारी किया है कि ऐसे FIR को ऑनलाइन अपलोड न किया जाये। इस संबंध में बिहार के डीजीपी ने भी सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है लेकिन फिर भी कुछ जिले ऐसे हैं जहां इन निर्देशों की खिल्ली उड़ाते हुए प्रतिबंधित FIR भी ऑनलाइन कर दिए गए हैं।
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प्रतिबंधित FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि बलात्कार और पोक्सो एक्ट के FIR में पीड़िता की पहचान को उजागर नहीं करना होता है। अगर इन मामलों से संबंधित FIR को वेबसाइट पर डाला जाता है तो इससे पीड़िता की पहचान उजागर होती है और इससे उसे खतरा भी हो सकता है। वहीं आतंकवादी घटनाओं से संबंधित FIR में आरोपी की पहचान उजागर होने के कारण उनके संबंधित संगठन और आरोपी के पहचान उजागर हो सकते हैं। इसलिए इन मामलों को अपवाद की श्रेणी में रखा गया है और इन मामलों में FIR ऑनलाइन अपडेट नहीं किया जा सकता है।
अब इस संबंध में SCRB के ADG ने भागलपुर समेत कई अन्य जिलों को इन FIR की जानकारी समेत अन्य कई जिलों को भी निर्देश जारी किया गया है साथ ही उन्हें चेतावनी दी गई है कि इस संबंध में आगे से ख्याल रखा जाये।
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