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बीपीएससी शिक्षक बहाली में गड़बड़ी, बैकडोर से दी गई नौकरियां!

बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की शिक्षक बहाली विवादों के घेर में आ गई है. एक तरफ असफल कैंडिडेट्स बीपीएससी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं विपक्ष ने नीतीश सरकार को घेर लिया है. बीपीएससी की 1 लाख 70 हजार पदों के लिए हुई शिक्षक बहाली परीक्षा में गड़बड़ी और घोटाले के आरोप लगने से सियासी पारा गर्मा गया है. इस परीक्षा में असफल रहे अभ्यर्थियों ने बीते दिनों पटना में आयोग के दफ्तर के बाहर डेरा डाल दिया. साथ ही सोशल मीडिया पर नीतीश सरकार और बीपीएससी के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया. अभ्यर्थियों ने सामाजिक विज्ञान, गणित, कंप्यूटर साइंस व अन्य विषयों में फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया.

बिहार में शिक्षक नियुक्ति के लिए जारी परिणाम में कथित फर्जीवाड़ा का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों ने बुधवार को बिहार लोक सेवा आयोग मुख्यालय पर प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि बिना योग्यता वाले का रिजल्ट जारी किया गया है. बीपीएससी के अध्यक्ष को जवाब देना चाहिए. हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और लाठीचार्ज कर सभी को खदेड़ दिया. लाठीचार्ज में कई अभ्यर्थी व छात्र नेता को चोटें आईं. इस बीच बीपीएससी की ओर से बुधवार यानि 25 अक्टूबर को शिक्षक भर्ती परीक्षा की कट ऑफ लिस्ट जारी कर दी गई है. कक्षा एक से पांच, कक्षा 9 एवं 10, कक्षा 11 और 12 सबका कट ऑफ मार्क्स अलग-अलग जारी किया गया है. शिक्षक अभ्यर्थी बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाकर इसे चेक कर सकते हैं.

बताते चलें कि दूसरी ओर, विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने शिक्षक बहाली परीक्षा में धांधली की जांच की मांग की है. पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने आरोप लगाए कि इस परीक्षा में नीतीश सरकार द्वारा पैसे लेकर नौकरियां बांटी गई है.

बता दें कि पिछले हफ्ते जारी हुए बीपीएससी शिक्षक बहाली के रिजल्ट के बाद से ही अभ्यर्थियों ने आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. पटना में बीपीएससी के दफ्तर के बाहर राज्यभर से आए अभ्यर्थी रोजाना प्रदर्शन कर रहे हैं. अब उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाने का भी फैसला लिया है. अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस सरकार और आयोग की ओर से इस परीक्षा में गलत तरीके से नौकरियां दी गई हैं और इससे घोटाले की बू आ रही है. 

शिक्षक अभ्यर्थियों का आरोप है कि एक ही कैटेगरी में जिन लोगों को कम नंबर आया है, उनको भी पास घोषित कर दिया गया है. वहीं अधिक अंक लाने के बावजूद कई अभ्यर्थियों को फेल कर दिया गया है. इतना ही नहीं जिला आवंटन में जिन तीन जिलों का नाम मांगा गया था, उनको छोड़कर अन्य जिले दिए जा रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि प्राइमरी में भी B.Ed का रिजल्ट जारी कर दिया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा रखी है.

इसके साथ ही आपको बता दें कि इससे पूर्व अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मांगों से संबंधित ज्ञापन बीपीएससी अधिकारियों को सौंपा. आयोग के अध्यक्ष अतुल प्रसाद ने अभ्यर्थियों को बताया कि आयोग ने परिणाम घोषित किया है, अब शिक्षा विभाग अभ्यर्थियों के अपलोड किए गए कागजात की जांच कर रहा है. कागजात की गड़बड़ी पकड़ में आ जाएगी.

अभ्यर्थियों का कहना था कि जब नियुक्ति के लिए होने वाली परीक्षा में सभी को तीन चांस ही दिया जाना है तो बहाली में सामान्य अभ्यर्थी और नियोजित शिक्षकों के लिए अलग-अलग मेधा सूची जारी होनी चाहिए. साथ ही एक सीट पर एक ही अभ्यर्थी का परिणाम जारी होना चाहिए.

छात्र नेता दिलीप कुमार ने वीडियो जारी कर कहा कि 2019 में जब एसटीईटी परीक्षा हुई थी तो उसमें बिहार के बाहर के लोग शामिल नहीं हुए थे. डोमिसाइल नीति भी लागू नहीं थी. फिर शिक्षक भर्ती परीक्षा में आयोग की ओर से कैसे बिहार के बाहर के कई लोगों को ज्वाइनिंग लेटर दे दिया गया. इसके साथ ही बिहार के कई लोगों ने फर्जी तरीके से अपना डॉक्यूमेंट बनवाया है. आयोग की ओर से उनका भी रिजल्ट जारी कर दिया गया है. बीपीएससी इस पूरे मामले की जांच करे और जो लोग दोषी हैं उनपर कार्रवाई भी करे. इसके साथ ही दूसरी मेधा सूची जारी करें. 

छात्र नेता दिलीप ने कहा कि हम लोग बीपीएससी अध्यक्ष अतुल प्रसाद से मिलकर वापस लौट रहे थे. हमारा पूरा प्रदर्शन खत्म हो गया था. फिर पुलिस ने क्यों लाठी चार्ज किया. यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है. यह दुखद है. इसकी भी जांच होनी चाहिए कि जब प्रदर्शन खत्म हो गया था तो फिर पुलिस ने साजिशन लाठीचार्ज क्यों की.

वहीं दूसरी ओर, विपक्ष ने इस मुद्दे को लपक लिया है और नीतीश सरकार से कथित घोटाले की जांच की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी कर दी है. हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने मंगलवार को आरोप लगाए कि शिक्षक बहाली में लैंड फॉर जॉब की तर्ज पर घोटाला हुआ है. नीतीश सरकार ने पैसे देकर शिक्षक की नौकरियां बांटी है. इसकी बड़े स्तर पर जांच होनी चाहिए.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को कहा कि जल्द ही वे इस मुद्दे पर बड़ा खुलासा करेंगे. वे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे. शिक्षक बहाली में कई तरह की अनियमितताएं की गई हैं. इस पर इतने सवाल उठ रहे हैं, इसके बावजूद सरकार अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने में जुटी है.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया इस बात को दर्शाती है कि किस तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी कमजोर होती याददाश्त और बढ़ती उम्र के कारण सारा नियंत्रण और क्षमता खो चुके हैं. हम नहीं जानते कि वास्तव में कितने नए उम्मीदवारों को नौकरी मिलेगी. यह एक घोटाला है. यहां तक कि सीधी-सादी भर्ती प्रक्रिया भी हंसी का पात्र बनकर रह गई है, क्योंकि इसका इरादा कभी नेक था ही नहीं.

सम्राट चौधरी ने कहा कि केवल संख्या बढ़ाने के लिए परीक्षा लेने और सालों से काम कर रहे शिक्षकों को दोबारा नियुक्ति पत्र जारी करने का कोई मतलब नहीं है. लेकिन वही हो रहा है. भर्ती प्रक्रिया की पूरी कवायद अवैध है. नए उम्मीदवार कहां हैं और कितने हैं? इसकी जानकारी ही नहीं है.

दूसरी ओर, बीपीएससी ने शिक्षक बहाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार कर दिया है. आयोग फिलहाल दो नवंबर को पटना के गांधी मैदान में होने वाले आयोजन की तैयारी में व्यस्त है. इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटेंगे. इस समारोह में कुल 25 हजार अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे.

बता दें कि बिहार में शिक्षकों के 1 लाख 70 हजार पदों पर बीपीएससी ने भर्ती निकाली थी. इसके लिए आयोजित परीक्षा में 1.22 लाख अभ्यर्थी ही सफल हो सके. इस कारण करीब 48 हजार सीटें खाली रह गईं। खाली पदों की संख्या और भी बढ़ सकते हैं, क्योंकि इस परीक्षा में सफल हुए करीब 45 हजार नियोजित शिक्षक हैं, जो पहले से नौकरी कर रहे हैं. इसके अलावा, नाम की गलत स्पेलिंग या गलत आधार नंबर जैसी गड़बड़ियों के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार संदेह के घेरे में हैं. बीपीएससी भी शायद इसे लेकर आश्वस्त नहीं है और पूरी जांच के बिना ही अभ्यर्थियों के नाम नियुक्ति पत्र के लिए भेज दिए गए थे. इसे लेकर आयोग का शिक्षा विभाग के साथ भी टकराव हुआ था.

अदालत में जाएगा शिक्षक बहाली का मामला?

बीपीएससी से संतुष्ट जवाब नहीं मिलने के बाद शिक्षक अभ्यर्थियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया है. पटना हाईकोर्ट के वकील शिवनंदन सिंह का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थी उनके पास आए हैं और इस मामले में वे रिट दायर करने की योजना बना रहे हैं. प्रथम दृष्टया यह अनियमितता का मामला लग रहा है. ऐसा लगता है कि मानदंडों को पूरा करने के बावजूद उच्च योग्यता वाले उम्मीदवारों को छोड़ दिया गया है. बाहरी राज्य के कई उम्मीदवार भी माध्यमिक स्तर तक पहुंच गए हैं, जबकि अन्य विसंगतियों भी हैं.