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बिहार के चाणक्य हैं नीतीश कुमार, सिर्फ 45 विधायकों के दम पर राजद-कांग्रेस को बैकफुट पर ढकेला

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अगर आधुनिक बिहार का चाणक्य कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा. तभी तो सरकार चाहे एनडीए की बने या महागठबंधन की लेकिन मुख्यमंत्री हमेशा नीतीश कुमार ही बनते हैं. नीतीश कुमार की पॉलिटिकल पॉवर एक बार फिर से देखने को मिली है. नीतीश कुमार ने सिर्फ एक कदम से ना सिर्फ जेडीयू की आंतरिक कलह को शांत कर दिया, बल्कि महागठबंधन में राजद और कांग्रेस को भी बैकफुट पर ढकेल दिया है. ये काम उन्होंने सिर्फ 45 विधायकों की दम पर किया. इसमें कोई शक नहीं कि अगर नीतीश कुमार की जगह कोई दूसरा नेता होता, तो तीसरे नबंर की पार्टी होने के बाद भी ड्राइविंग सीट पर ना बैठा होता. 

पटना इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति का वह स्क्रू पता है जिसे टाइट करते ही बिहार की सत्ता उनके इर्द-गिर्द ही घूमती है. हाल ही में नीतीश ने पेंच तो ललन सिंह का टाइट किया लेकिन राइट टाइम राजद और कांग्रेस हो गई. दरअसल, नीतीश कुमार ने जैसे ही जेडीयू की कमान संभाली तो राजद की ओर से तेजस्वी यादव को सीएम बनाने की मांग उठनी बंद हो गई. कांग्रेस पार्टी भी अब इंडी गठबंधन में नीतीश कुमार को संयोजक बनाने में जुटी हुई है. 

आलम ये है कि राजद और कांग्रेस अब मुख्यमंत्री को मनाने में जुटे और नीतीश कुमार रूठे फूफा की तरह किसी को भाव नहीं दे रहे हैं. नीतीश की चालें सत्यापित करती रही हैं कि विधायकों एवं सांसदों की संख्या के आधार पर ही जदयू की ताकत का अंदाजा लगाना सौ प्रतिशत सही नहीं होगा. उसके पास नेता के रूप में नीतीश कुमार भी हैं, जिन्हें सभी मानकों से ऊपर की हस्ती माना जाता है. तभी तो 45 विधायकों के साथ नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और 79 विधायकों के बाद भी तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम हैं. 

इतना ही नहीं बीजेपी आज भी नीतीश कुमार को अपने पाले में खड़े करने के लिए उत्साहित है. कहा जा रहा है कि मकर संक्रांति तक बिहार की सत्ता में पूरे 90 डिग्री का परिवर्तन हो सकता है. हालांकि, राजद की ओर से नीतीश को मनाने की पूरी कोशिश की जा रही है. सूत्र बताते हैं कि लालू यादव और तेजस्वी यादव की ओर से अपनी पार्टी के नेताओं को नीतीश के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलने की हिदायत दी गई है. तभी तो राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह का आजकल सोशल मीडिया पर ज्ञान समाप्त हो चुका है. सूत्र तो ये भी कह रहे हैं कि नीतीश और लालू के बीच अब 2025 तक नेतृत्व परिवर्तन की कोई बात नहीं होनी की डील चल रही है. इसका नतीजा क्या निकलेगा ये फिलहाल भविष्य की गर्त में छिपा हुआ है.